
Chhattisgarh Road Projects: छत्तीसगढ़ में अब सड़कें सिर्फ आने-जाने का ज़रिया नहीं रहेंगी, बल्कि विकास का हाईवे बनेंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में केंद्र सरकार के विकसित भारत मिशन के तहत राज्य में जबरदस्त सड़क नेटवर्क खड़ा किया जा रहा है। इकोनॉमिक कॉरिडोर से लेकर नक्सल इलाकों तक, हर दिशा में सड़कें दौड़ रही हैं।
18,215 करोड़ की 37 सड़क परियोजनाएं चालू
Vishnudev Sai Development Plans: फिलहाल छत्तीसगढ़ में 18,215 करोड़ रुपये की लागत से 37 नेशनल हाईवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 1131 किलोमीटर होगी। इसके अलावा 24,693 करोड़ की लागत से नए हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) भी तैयार की जा रही है।
भारत सरकार ने राज्य में नेशनल हाईवे के उन्नयन के लिए 5353 करोड़ रुपये की 18 योजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं के पूरे होने के बाद राज्य के दूरदराज़ और पिछड़े इलाकों को राजधानी और दूसरे राज्यों से सीधे कनेक्टिविटी मिलेगी।
रायपुर-दुर्ग बायपास और औद्योगिक जोन का सीधा फायदा
Chhattisgarh Highway Construction: राज्य सरकार ने रायपुर और दुर्ग के बीच भारी ट्रैफिक से निजात दिलाने 92 किलोमीटर लंबे 6-लेन बायपास रोड को दो पैकेजों में बनाना शुरू कर दिया है। इसकी लागत 2289 करोड़ रुपये है।
साथ ही कोरबा-बिलासपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निर्माण की भी तैयारी है, ताकि सड़क किनारे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
दो इकोनॉमिक कॉरिडोर: व्यापार का रास्ता, रोज़गार का ज़रिया
Raipur Durg Bypass Project: छत्तीसगढ़ से विशाखापट्टनम पोर्ट तक उत्पादों को पहुंचाने और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। यह 6 लेन की सड़क 124 किलोमीटर लंबी होगी, जिस पर 4146 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
दूसरा इकोनॉमिक कॉरिडोर बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव से होकर झारखंड की इंडस्ट्रियल सिटी रांची और धनबाद को जोड़ेगा। इसकी लंबाई 157 किलोमीटर और लागत 4007 करोड़ रुपये तय की गई है।
एलडब्ल्यूई और पीएम-जनमन योजना से बदलेगा नक्सल इलाकों का चेहरा
Economic Corridor Chhattisgarh: 2014 से 2025 के बीच छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें बिछाने 2625 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। एलडब्ल्यूई योजना के तहत इन इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी है।
इसी तरह प्रधानमंत्री जनजातीय जनमन योजना के तहत छत्तीसगढ़ को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। 715 सड़कों के जरिए 2449 किलोमीटर सड़कें बनाई जा रही हैं, जिसकी लागत 1699 करोड़ रुपये है। इससे 775 विशेष पिछड़ी जनजातीय बस्तियां सीधे जुड़ जाएंगी।
इंटर स्टेट कनेक्टिविटी और फीडर रूट्स पर भी फोकस
Raipur Visakhapatnam Corridor: सरकार का ध्यान सिर्फ हाईवे पर नहीं, बल्कि फीडर रूट्स और इंटर स्टेट लिंकिंग पर भी है। उरगा-कटघोरा बायपास, बसना-सारंगढ़ (माणिकपुर) फीडर रूट, सारंगढ़-रायगढ़ लिंक और रायपुर-लखनादोन आर्थिक गलियारा जैसी परियोजनाओं पर 9208 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है।
केंद्रीय सड़क निधि से भी छत्तीसगढ़ को 908 करोड़ रुपये मिले हैं, जिससे राज्य के अंदरूनी इलाकों की सड़कों को भी चमकाया जाएगा।
2014 से अब तक सड़क निर्माण में लगे 21 हजार करोड़ से ज्यादा
National Highway Projects Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में 2014 से 2025 तक सड़क निर्माण में अब तक 21,380 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। सिर्फ नेशनल हाईवे ही नहीं, बल्कि CRIF, केंद्रीय सड़क योजना और अन्य इकोनॉमिक महत्व की सड़कों के लिए भी 3826 करोड़ के 70 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है।
छत्तीसगढ़ अब गड्ढों और टूटी सड़कों का नहीं, बल्कि मल्टीलेन हाईवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रदेश बनने जा रहा है। सड़कें सिर्फ रास्ते नहीं होतीं, ये तरक्की की पटरी होती हैं – और इस बार ये पटरी दिल्ली से लेकर दंतेवाड़ा तक बिछाई जा रही है।
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