रायपुर के इस अस्पताल का अजीबोगरीब ऑफर: हेल्थ चेकअप कराओ और दुबई जाओ! स्वास्थ्य विभाग ने थमाया नोटिस, तो विज्ञापन लिया वापस

Raipur. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक निजी अस्पताल के विज्ञापन ने चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है। अंबुजा सिटी सेंटर के पास स्थित ITSA अस्पताल ने अपने हेल्थ चेकअप पैकेज के प्रचार के लिए एक अनोखा पैंतरा आजमाया। अस्पताल ने दावा किया था कि जो मरीज उनके यहां जांच कराएंगे, उन्हें लकी ड्रॉ के जरिए ‘दुबई टूर’ और दो करोड़ रुपये तक के इनाम जीतने का मौका मिलेगा। जैसे ही यह विज्ञापन सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर वायरल हुआ, स्वास्थ्य विभाग ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। अधिकारियों का मानना है कि इलाज जैसी गंभीर सेवा को लॉटरी या विदेश यात्रा के प्रलोभन से जोड़ना अनैतिक और मरीजों के साथ धोखेबाजी है।

CMHO ने थमाया कारण बताओ नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने 14 जनवरी को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। विभाग ने अस्पताल को नोटिस जारी कर इस भ्रामक प्रचार को तुरंत रोकने और विज्ञापन हटाने के निर्देश दिए। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि अस्पताल ऐसी गतिविधियों को बंद नहीं करता, तो उसका लाइसेंस रद्द करने जैसी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस आदेश की जानकारी राज्य स्वास्थ्य संचालक और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) को भी दे दी गई है ताकि भविष्य में कोई अन्य संस्थान ऐसी हिमाकत न करे।

मेडिकल एथिक्स और कानून का उल्लंघन

स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल का यह कृत्य नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों का सीधा उल्लंघन है। चिकित्सा कानून के मुताबिक, किसी भी क्लिनिक या अस्पताल को अपनी सेवाओं के बदले मरीजों को इनाम, लॉटरी या नकद राशि का लालच देने की अनुमति नहीं है। ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट और नर्सिंग होम एक्ट के तहत भी ऐसे दावों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के सदस्यों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं कोई व्यापारिक सेल नहीं हैं, जहां ‘लकी ड्रॉ’ के जरिए ग्राहकों को बुलाया जाए। यह परंपरा चिकित्सा पेशे की गरिमा को गिराती है।

अस्पताल प्रबंधन ने चुपचाप वापस लिया ऑफर

स्वास्थ्य विभाग की फटकार और कानूनी कार्रवाई के डर से ITSA अस्पताल ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। नोटिस मिलने के दो दिन बाद यानी 16 जनवरी को अस्पताल ने एक स्पष्टीकरण जारी कर दुबई टूर वाले ऑफर को अमान्य घोषित कर दिया। अस्पताल के मार्केटिंग विभाग ने स्वीकार किया कि सरकारी नोटिस मिलने के बाद विज्ञापन को हटा लिया गया है। प्रबंधन ने विभाग को जवाब देते हुए यह भी भरोसा दिलाया है कि भविष्य में इस तरह के लुभावने विज्ञापनों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस पूरे विवाद के बाद अस्पताल की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर उठ रहे हैं।

पहले भी सुर्खियों में रहे हैं ऐसे भ्रामक विज्ञापन

चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह के विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। कुछ साल पहले गुरुग्राम के एक बड़े अस्पताल ने भी ‘फ्री इलाज’ के नाम पर भ्रामक विज्ञापन जारी किया था, जिस पर मेडिकल काउंसिल ने संबंधित डॉक्टरों पर भारी जुर्माना लगाया था। रायपुर के इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि निजी अस्पताल प्रतिस्पर्धा के चक्कर में अक्सर नियमों की सीमा लांघने की कोशिश करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों को अस्पताल का चुनाव डॉक्टर की काबिलियत और सुविधाओं के आधार पर करना चाहिए, न कि किसी लॉटरी या विदेश यात्रा के झांसे में आकर।

नियमों की अनदेखी पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई

चिकित्सा नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ प्रशासन के पास कड़े अधिकार सुरक्षित हैं। नियमों के मुताबिक, भ्रामक विज्ञापन जारी करने पर अस्पताल पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उसके संचालकों पर आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है। सबसे गंभीर स्थिति में अस्पताल का पंजीयन स्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने अब जिले के सभी निजी अस्पतालों को सतर्क कर दिया है कि वे प्रचार-प्रसार के लिए केवल स्वीकृत मानकों का ही उपयोग करें। विभाग की एक टीम अब निजी अस्पतालों की मार्केटिंग गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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