
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 के अगले ही दिन सर्राफा बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। बजट में कीमती धातुओं को लेकर कोई बड़ी विशेष घोषणा न होने के बाद कमोडिटी मार्केट में निवेशकों ने अपना रुख बदल लिया है। इसके चलते सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का कहना है कि बजट के बाद निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक संकेतों ने घरेलू बाजार में कीमतों को नीचे धकेल दिया है।
रायपुर में सोने के दाम 10 हजार रुपये गिरे
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोने की कीमतों में एक ही दिन में 10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट आई है। इस कटौती के बाद अब सोने का भाव गिरकर 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। कल तक ऊंचे भाव पर रहने वाला सोना अब खरीदारों के लिए थोड़ा सस्ता हुआ है। निवेशकों द्वारा सोने से अपना पैसा निकालकर अन्य विकल्पों में लगाने और डॉलर की मजबूती को इस गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है।
चांदी की चमक भी पड़ी फीकी
सोने के साथ-साथ चांदी खरीदने वालों के लिए भी राहत की खबर है। रायपुर के बाजार में चांदी के भाव 30,000 रुपये प्रति किलो तक टूट गए हैं। अब चांदी की नई कीमत 2,65,000 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले सप्ताह चांदी के दाम काफी ऊंचे स्तर पर थे, लेकिन अब वैश्विक बाजारों में आई कमजोरी और मुनाफावसूली की वजह से इसमें भारी गिरावट देखने को मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर का असर
घरेलू बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। ग्लोबल मार्केट में चांदी का हाजिर भाव फिलहाल 95.26 डॉलर प्रति औंस के आसपास है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से सोने और चांदी की खरीदारी पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में सोने-चांदी पर सीमा शुल्क (Custom Duty) में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई। इसी वजह से बड़े निवेशकों ने अपनी रणनीति बदलते हुए बाजार से पैसा निकाला है।
क्या अब निवेश करना फायदेमंद होगा?
कीमती धातुओं में आई इस अचानक गिरावट ने छोटे निवेशकों और गहने बनवाने वालों को चौंका दिया है। बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर आप लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो कीमतों में आई यह कमी एक अच्छा मौका साबित हो सकती है। हालांकि, खरीदारी से पहले वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और डॉलर की चाल पर नजर रखना जरूरी है ताकि सही समय पर सही फैसला लिया जा सके।



