
राजधानी रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल में सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस हादसे के बाद राज्य सरकार हरकत में आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में राज्य अनुश्रवण समिति की आपात बैठक बुलाई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए साफ कहा कि सफाई के नाम पर किसी की जान जोखिम में डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जबरन गटर में उतारा तो होगी जेल और भारी जुर्माना
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ाई से निर्देश दिए कि जो भी व्यक्ति या संस्थान किसी मजदूर को जबरन हाथ से मैला उठाने या सीवरेज टैंक के अंदर उतरने के लिए मजबूर करेगा उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि ‘हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध अधिनियम 2013’ के तहत ऐसा करने वालों को एक साल की जेल या 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार अब इस कानून को जमीन पर सख्ती से लागू करने जा रही है।
अब केवल नगर निगम और पंजीकृत संस्थाएं ही करेंगी सफाई
हादसे से सबक लेते हुए सरकार ने सीवरेज सफाई के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अब कोई भी निजी अस्पताल या संस्थान अपनी मर्जी से किसी भी मजदूर को टैंक में नहीं उतार सकेगा। नियमों के अनुसार अब सफाई का कार्य केवल नगर निगम के माध्यम से या शासन द्वारा पंजीकृत संस्थाओं के जरिए ही कराया जा सकेगा। इन संस्थाओं के पास सफाई के आधुनिक उपकरण और सुरक्षा किट होना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाली संस्थाओं के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन और जिलों का सर्वे
बैठक में बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के बाद पूरे प्रदेश में मैनुअल स्कैवेंजर यानी हाथ से मैला ढोने वालों का फिर से सर्वे कराया गया है। राज्य के सभी जिला कलेक्टरों ने अपने जिलों को इस कुप्रथा से मुक्त होने का प्रमाण पत्र भी दिया है। सरकार ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कागजी प्रमाण पत्र के साथ-साथ जमीनी हकीकत पर भी नजर रखनी होगी ताकि रामकृष्ण अस्पताल जैसा हादसा दोबारा न हो।
पीड़ित परिवारों को मदद और दोषियों पर एक्शन की तैयारी
मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि उन्हें नियमानुसार हर संभव सहायता और मुआवजा जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि इस मामले की गहन जांच की जाए और अस्पताल प्रबंधन या ठेकेदार की ओर से हुई चूक की जिम्मेदारी तय कर उन पर कानूनी शिकंजा कसा जाए। सरकार का लक्ष्य है कि इस मामले में ऐसी कार्रवाई हो जो दूसरों के लिए एक सबक बने।
सुरक्षा उपकरणों के बिना सफाई पर पूरी तरह पाबंदी
नगरीय प्रशासन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे सफाई के दौरान उपयोग किए जाने वाले सुरक्षा मापदंडों की एक विस्तृत सूची जारी करें। इसमें ऑक्सीजन मास्क, गैस डिटेक्टर और विशेष सुरक्षा सूट का उपयोग अनिवार्य होगा। यदि किसी भी जगह बिना इन उपकरणों के सफाई होती पाई गई तो संबंधित अधिकारी और संस्था जिम्मेदार होगी। बैठक में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और कई वरिष्ठ विधायक भी मौजूद रहे जिन्होंने इस मानवीय मुद्दे पर ठोस नीति बनाने पर जोर दिया।
पिछली बैठकों का विवरण और भविष्य की कार्ययोजना
समिति की बैठक में साल 2018 के बाद से अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मैनुअल स्कैवेजिंग को खत्म करने के लिए नई तकनीक और रोबोटिक मशीनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार अब नगर निगमों को बजट मुहैया कराएगी ताकि वे आधुनिक मशीनें खरीद सकें और इंसानों को गटर में उतरने की जरूरत ही न पड़े। इस बैठक के बाद यह उम्मीद जगी है कि अब सफाई कर्मियों के जीवन की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अधिक गंभीर होगा।
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