
बिलासपुर, 17 जून 2025 CG Principal Promotion: छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति को लेकर लंबे समय से जारी कानूनी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। बिलासपुर हाईकोर्ट में पिछले कुछ दिनों से लगातार चली सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की निगाहें कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले पर टिकी हैं, जो सैकड़ों शिक्षकों का भविष्य तय कर सकता है
डबल बेंच में हुई सुनवाई, सभी पक्षों की दलीलें सुनी गईं
11 जून से लगातार चली इस सुनवाई का समापन आज 17 जून को हुआ। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें माननीय न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति अमितेंद्र कुमार प्रसाद शामिल थे, ने की। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने सरकार का पक्ष रखा, जबकि प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पेश कीं।
फोरम ने रखी मजबूत पैरवी, फैसले को लेकर जताई उम्मीद
Prayacharya Padonnati: प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से अधिवक्ता अनूप मजूमदार, आलोक बख्शी, अमृतोदास, एन. नहा राय और विनोद कुमार देशमुख ने प्रभावी पैरवी की। फोरम के संयोजक अनिल शुक्ला ने सुनवाई के बाद कहा कि जो मजबूत तथ्य और तर्क पेश किए गए हैं, उनसे उन्हें पूरा भरोसा है कि निर्णय फोरम के पक्ष में आएगा।
उन्होंने कहा कि 16 जून से नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है और ऐसे समय में पदोन्नति से जुड़े इस फैसले का जल्द आना बेहद जरूरी है, ताकि योग्य शिक्षकों को समय रहते प्रशासनिक जिम्मेदारियां मिल सकें।
कोर्टरूम में मौजूद रहे फोरम के प्रतिनिधि
आज की सुनवाई में प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से आकाश राय, एस.के. चिंचालकर, विकास नायक और मनोज कुमार सनाढ्य भी उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर पदोन्नति के मुद्दे को मजबूती से उठाया।
सिर्फ कोर्ट केस नहीं, सिस्टम में बदलाव की उम्मीद
यह मामला सिर्फ पदोन्नति से जुड़ी एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक पदों की पारदर्शिता और न्यायपूर्ण बहाली की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। फैसला जिस भी पक्ष में आए, यह साफ है कि इसका असर राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था पर गहरा पड़ने वाला है।
अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही निर्णय सामने आएगा और एक लंबे समय से रुका हुआ रास्ता साफ हो सकेगा।



