
छत्तीसगढ़ के मुक्तिधामों की खराब स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने सभी जिलों के कलेक्टरों से फोटो सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई। इसके बाद डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को आदेशों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को भी शपथ पत्र के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी।
मुक्तिधामों में मूलभूत व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार की
शासन ने बताया कि सभी मुक्तिधामों के रखरखाव के लिए साफ सफाई, बाउंड्री, शेड की मरम्मत, बिजली, पानी और अलग शौचालय जैसी सुविधाओं के निर्देश दे दिए गए हैं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस एके प्रसाद ने कहा कि गरिमा के साथ अंतिम संस्कार करने का अधिकार संविधान के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। इसलिए राज्य का दायित्व है कि हर मुक्तिधाम में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।
बिल्हा मुक्तिधाम में अव्यवस्था देखकर कोर्ट ने लिया संज्ञान
मुख्य न्यायाधीश 29 सितंबर को बिल्हा के मुक्तिधाम पहुंचे थे, जहां उन्होंने गंदगी और अव्यवस्था देखी। वे एक न्यायिक अधिकारी के पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे थे। इस स्थिति पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लिया। पिछली सुनवाई में मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और बिलासपुर कलेक्टर ने अपने शपथ पत्र प्रस्तुत किए थे। विभागों ने 6 और 8 अक्टूबर को राज्यभर में दिशा निर्देश जारी किए, जिस पर कोर्ट ने कहा कि केवल निर्देश जारी करना काफी नहीं है।
रहंगी मुक्तिधाम में तुरंत किए गए सुधार
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद रहंगी मुक्तिधाम में सुधार कार्य तेजी से शुरू किया गया। कलेक्टर द्वारा दिए गए शपथ पत्र में बताया गया कि मुक्तिधाम में पानी, बैठने की व्यवस्था और प्लेटफॉर्म की मरम्मत कराई गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने हॉल को खाली कर प्रतीक्षालय में बदला गया है ताकि परिवारों को सुविधा मिल सके।
सड़क निर्माण के लिए मिली प्रशासनिक स्वीकृति
कलेक्टर ने कोर्ट को बताया कि मुख्य सड़क से मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए सीसी रोड बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। इसके लिए दस लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि सुधार कार्य समय पर पूरे हों और सभी मुक्तिधामों में ऐसी स्थितियां दोबारा न बनें, इसके लिए प्रशासन सतर्क रहे।



