कर्मागढ़ के मानकेश्वरी मंदिर में सैकड़ों बकरे की बलि, बैगा पीते हैं खून; सदियों पुरानी है यह अनोखी परंपरा

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कर्मागढ़ स्थित मानकेश्वरी मंदिर में सदियों पुरानी और रियासतकालीन परंपरा आज भी जारी है। यहाँ शरद पूर्णिमा के अवसर पर सैकड़ों बकरों की बलि दी जाती है, जिसे देखने के लिए पड़ोसी राज्य ओडिशा समेत कई जिलों से हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और मेले जैसा माहौल बन जाता है। सोमवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ के साथ बलि की यह परंपरा निभाई गई।

बैगा के शरीर में आता है देवी का प्रभाव

सदियों से चली आ रही इस अनोखी परंपरा के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन आयोजित विशेष पूजा-अर्चना के दौरान मंदिर के बैगा (पुजारी) के शरीर में माँ मानकेश्वरी देवी का चैतन्य प्रभाव आता है। इस दौरान बैगा बलि दिए गए बकरे के रक्त को पीकर ग्रहण करते हैं। समिति के सदस्यों ने बताया कि इस समय बैगा के ऊपर माँ मानकेश्वरी देवी और उनके पीछे झंडा लेकर चलने वाले व्यक्ति के ऊपर भीमसेन सवार होते हैं। श्रद्धालु मन्नतें पूरी होने के बाद यहाँ बकरा लेकर पहुंचते हैं और सुबह से देर रात तक सौ से अधिक बकरों की बलि दी जाती है।

अंगूठी का रहस्य और राजपरिवार की कुलदेवी

इस मंदिर की स्थापना रायगढ़ राजपरिवार द्वारा की गई थी और माँ मानकेश्वरी देवी उनकी कुलदेवी हैं। यहाँ की मान्यता अनुसार, बलि पूजा से पूर्व विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है और निशा पूजन के दौरान राजपरिवार से बैगा को एक अंगूठी पहनाई जाती है। कहा जाता है कि वह अंगूठी बैगा की अंगुली के नाप की नहीं होती, लेकिन शरद पूर्णिमा के दिन बलपूजा के दौरान वह अंगूठी बैगा के हाथों में इस कदर कस जाती है कि जैसे वह उन्हीं के नाप की हो। यह इस बात का प्रतीक माना जाता है कि माता का वास बैगा के शरीर में हो गया है।

मधुमक्खियों के हमले से हुआ था युद्ध का फैसला

इस मंदिर का इतिहास भी बेहद रोचक है। बताया जाता है कि लगभग 1700 ईसवी में जंजीरों में जकड़े हिमगिरि (ओडिशा) रियासत के राजा को भटकते हुए कर्मागढ़ में माँ मानकेश्वरी ने दर्शन देकर बंधन मुक्त किया था। वहीं, सन 1780 में ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अंग्रेज ने कठोर लगान वसूलने के लिए रायगढ़ और हिमगिरि पर हमला कर दिया था। युद्ध कर्मागढ़ के जंगली मैदान पर हुआ था, जहाँ अचानक मधुमक्खियों और जंगली कीटों ने अंग्रेजों पर हमला कर दिया। अंग्रेज पराजित होकर लौट गए और उन्होंने भविष्य में रायगढ़ स्टेट को स्वतंत्र घोषित कर दिया था।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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