
छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम और कभी नक्सलवाद के साये में रहे अबुझमाड़ के युवाओं के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खास रहा। नारायणपुर जिले के सुदूर और संवेदनशील इलाकों से आए 147 अबूझमाड़िया युवाओं ने पहली बार रायपुर पहुंचकर विधानसभा की कार्यवाही को अपनी आंखों से देखा। स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना के तहत आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य इन युवाओं को शासन-प्रशासन की बारीकियों से रूबरू कराना था। ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों के बीच रहने वाले इन युवाओं ने जब सदन की भव्यता और वहां होने वाली चर्चाओं को देखा, तो उनके चेहरों पर एक नई चमक और कौतूहल साफ नजर आया।

कुतुल और ओरछा के जंगलों से निकलकर पहुंचे रायपुर
नारायणपुर जिले के कुतुल, ओरछा, कलमानार, झारावाही और गुमियाबेड़ा जैसे अति संवेदनशील गांवों से आए ये युवा विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से अधिकांश युवा ऐसे थे जिन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार रायपुर शहर देखा और पक्की सड़कों पर लंबा सफर तय किया। उनके लिए यह केवल एक पिकनिक नहीं, बल्कि दुनिया को एक नए नजरिए से देखने का मौका था। प्रशासन का मानना है कि ऐसे दौरों से मुख्यधारा से कटे हुए युवाओं के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है और वे विकास की प्रक्रिया को समझ पाते हैं।
सदन की कार्यवाही देख समझा कानून बनने का सफर
विधानसभा पहुंचने पर युवाओं ने दर्शक दीर्घा में बैठकर प्रश्नकाल और सदन में होने वाली तीखी चर्चाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखा। उन्हें बताया गया कि कैसे जनता की समस्याओं को विधायक सदन में उठाते हैं और किस तरह जनहित में नए कानून बनाए जाते हैं। विधायी प्रक्रिया की इस जानकारी ने युवाओं के भीतर लोकतंत्र के प्रति समझ को गहरा किया। उनके लिए यह अनुभव किसी रोमांच से कम नहीं था कि जिन नेताओं को वे केवल रेडियो या अखबारों में देखते-सुनते थे, वे उनके सामने बैठकर प्रदेश के भविष्य के फैसले ले रहे थे।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने जाना अबुझमाड़ का हाल
भ्रमण के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इन युवाओं से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने युवाओं के साथ जमीन पर बैठकर संवाद किया और उनके गांव की स्थिति के बारे में जानकारी ली। शर्मा ने युवाओं से पूछा कि नक्सलवाद के प्रभाव के कम होने के बाद अब उनके क्षेत्रों में विकास की गति कैसी है। उन्होंने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आप जैसे जागरूक युवा ही छत्तीसगढ़ के सुनहरे भविष्य की असली पहचान हैं। उपमुख्यमंत्री ने उन्हें शिक्षा और सकारात्मक सोच के साथ समाज में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
वनोपज और स्वरोजगार से जुड़ने का मंत्र
उपमुख्यमंत्री ने युवाओं को केवल सरकारी नौकरी के भरोसे न रहकर आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी। उन्होंने सुझाव दिया कि अबुझमाड़ के युवा स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों से जुड़कर स्थानीय स्तर पर मिलने वाली लघु वनोपजों (जैसे इमली, महुआ, चिरौंजी) का प्रसंस्करण और संवर्धन करें। इससे न केवल उनकी आजीविका बढ़ेगी, बल्कि उनके क्षेत्र की पहचान भी देशभर में बनेगी। उन्होंने शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए युवाओं को उनका लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
मंत्री केदार कश्यप ने अपने क्षेत्र के युवाओं से ली ‘फीडबैक’
झारावाही से नेडनार तक… उम्मीदों की नई उड़ान
नारायणपुर के स्थानीय विधायक और वन मंत्री केदार कश्यप ने भी अपने क्षेत्र के इन युवाओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने एक अभिभावक की तरह युवाओं से उनके गांव में सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा की सुविधाओं के बारे में विस्तार से बात की। कश्यप ने कहा कि अबुझमाड़ अब बदल रहा है और वहां की युवा पीढ़ी अब हथियारों के बजाय कलम और ज्ञान के साथ आगे बढ़ना चाहती है। युवाओं ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस यात्रा ने उनकी सोच का दायरा बढ़ा दिया है।

इस दल में शामिल युवाओं ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे राज्य की सबसे बड़ी पंचायत में बैठकर कार्यवाही देख पाएंगे। नेडनार और मुरहानार जैसे गांवों से आए युवाओं के लिए यह सफर प्रेरणादायी रहा। उन्होंने डिप्टी सीएम और मंत्रियों से खुलकर अपनी बातें कहीं और यह संकल्प लिया कि वे वापस जाकर अपने गांव के अन्य लोगों को भी सरकार की योजनाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में बताएंगे। यह यात्रा इन युवाओं के लिए शिक्षा, जागरूकता और नई उम्मीदों का एक संगम साबित हुई।
मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में बड़ा कदम
प्रशासन की इस पहल को बस्तर और अबुझमाड़ जैसे इलाकों में विश्वास बहाली के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय तक बाहरी दुनिया से कटे रहने के कारण इन क्षेत्रों के युवाओं में व्यवस्था को लेकर एक तरह का संकोच रहता है। ऐसे प्रत्यक्ष भ्रमण उस झिझक को तोड़ने का काम करते हैं। जब ये युवा अपने गांवों में लौटेंगे, तो वे विकास और शांति का संदेश लेकर जाएंगे। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में बस्तर के अन्य अंदरूनी इलाकों के युवाओं को भी इसी तरह के शैक्षणिक दौरों पर रायपुर लाया जाए।
विदाई के समय उत्साह और नई ऊर्जा
विधानसभा भ्रमण के अंत में युवाओं को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। विदाई के समय उनके चेहरों पर आत्मविश्वास की एक नई लकीर थी। उन्होंने कहा कि रायपुर की इस यात्रा ने उन्हें यह अहसास कराया है कि सरकार उनके गांव और उनकी समस्याओं के प्रति गंभीर है। अबुझमाड़ की पहाड़ियों में गूंजने वाली ये आवाजें अब विकास की नई इबारत लिखने को तैयार हैं। यह दौरा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सबसे पिछड़े इलाकों को प्रदेश की राजधानी से जोड़ने वाला एक मजबूत भावनात्मक सेतु बन गया है।
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