
पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट ने अब भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी इस जंग का असर भारतीय सीमाओं के भीतर न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष पत्र लिखकर सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार को आशंका है कि खाड़ी देशों के बिगड़ते हालात का इस्तेमाल कुछ तत्व देश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए कर सकते हैं।
गृह मंत्रालय ने जारी किया ‘हाई अलर्ट’
गृह मंत्रालय ने राज्यों को भेजे अपने पत्र में साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही घटनाओं का असर भारत में होने वाले धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक सभाओं में देखने को मिल सकता है। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर मंत्रालय ने उन रेडिकल उपदेशकों और समूहों पर पैनी नजर रखने को कहा है जो भड़काऊ भाषण देकर शांति भंग कर सकते हैं। सभी राज्यों के पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को पैदा होने से पहले ही रोका जा सके।
कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट पर लगी लगाम
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति काफी संवेदनशील हो गई है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर घाटी के कई हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार कम कर दी है। श्रीनगर, बडगाम और पुलवामा जैसे इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली अफवाहों और भड़काऊ वीडियो को रोकना है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
खामेनेई की मौत के बाद शिया बहुल इलाकों में आक्रोश
तेहरान में हुए अमेरिका-इजरायल के हवाई हमले में खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर के शिया बहुल इलाकों में भारी जनाक्रोश देखा जा रहा है। बडगाम, बांदीपोरा और अनंतनाग जैसे जिलों में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने धारा 144 जैसी पाबंदियां भी लागू की हैं। भारत सरकार इस पूरे मामले के भू-राजनीतिक असर के साथ-साथ देश के भीतर पड़ने वाले सुरक्षा प्रभावों की भी लगातार समीक्षा कर रही है।
सोशल मीडिया और भड़काऊ पोस्ट पर कड़ी नजर
सुरक्षा एजेंसियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खास नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। साइबर सेल उन अकाउंट्स की पहचान कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय युद्ध की आड़ में देश के भीतर नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की भड़काऊ बयानबाजी या पोस्ट साझा करने वालों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि समय पर हस्तक्षेप और बेहतर आपसी तालमेल से किसी भी साजिश को नाकाम किया जा सकता है।
देशव्यापी सुरक्षा और इंटेलिजेंस का बढ़ाया गया दायरा
भारत के लिए यह संकट केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा है। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं, साथ ही भारत का बड़ा व्यापारिक हित भी वहां से जुड़ा है। ऐसे में देश के भीतर धार्मिक भावनाओं का उद्वेग न हो, इसके लिए केंद्र ने राज्यों के साथ मिलकर एक व्यापक सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। हवाई अड्डों, बंदरगाहों और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि वैश्विक तनाव की छाया भारत की शांति पर न पड़े।
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