
CG Teachers on SIR Duty: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने का सीधा और गंभीर असर स्कूली शिक्षा पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में स्थिति यह है कि छात्रों का 40 प्रतिशत कोर्स भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इस समय भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे कार्यों में लगाई गई है, जिसके कारण वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। हर स्कूल से दो से तीन शिक्षकों को इस महत्वपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लगाया गया है, जिससे कक्षाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं और छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है।
शिक्षा मंत्री का वादा हवा-हवाई, छात्रों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा
हाल ही में राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बयान दिया था कि शिक्षकों की ड्यूटी गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाई जाएगी। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट है और यह वादा केवल बात बनकर रह गया है। शिक्षकों को स्कूल छोड़कर दूसरे कार्यों में लगाए जाने के कारण, छमाही परीक्षा (जो अगले महीने होनी है) से ठीक पहले छात्र-छात्राओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में लगा देने के कारण खासकर प्राइमरी स्कूलों में पांच-पांच शिक्षकों की ड्यूटी लगने से पढ़ाई बहुत प्रभावित हो रही है।
विषय शिक्षक नहीं, दूसरे टीचर ले रहे क्लास
गैर-शैक्षणिक ड्यूटी के चलते स्कूलों में एक और गंभीर समस्या पैदा हो गई है। कई स्कूलों में विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो उनकी कक्षाएं दूसरे विषय के शिक्षक ले रहे हैं। उदाहरण के लिए, संजय नगर स्कूल में विज्ञान, अंग्रेजी और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, वहीं निमोरा स्कूल में विज्ञान और हिन्दी विषय के शिक्षक ड्यूटी पर हैं। इस कारण स्कूलों में पढ़ाई केवल दूसरे विषय के शिक्षकों के भरोसे चल रही है, जिससे छात्रों को विषय की गहन जानकारी नहीं मिल पा रही है और उनकी शिक्षा का स्तर गिर रहा है।
बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी समुचित?
दिसंबर में छमाही परीक्षाएं होनी हैं और अभी तक कोर्स का बड़ा हिस्सा अधूरा है। शिक्षकों को बार-बार गैर-शैक्षणिक कार्य में लगाने से बच्चों की पढ़ाई में काफी नुकसान हो रहा है। संविधान और शिक्षा के अधिकार के बावजूद, जब शिक्षकों को उनके मूल कार्य से हटा दिया जाता है, तो यह सीधा सवाल खड़ा होता है कि बच्चों को समुचित तरीके से शिक्षा कैसे मिलेगी? शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बावजूद भी स्थिति में सुधार न होना, शिक्षा विभाग की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।



