
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 21 जनवरी को मंत्रालय में मंत्रिपरिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों पर चर्चा होनी है। शासन स्तर पर इस बैठक का एजेंडा तैयार कर लिया गया है जिसमें किसानों की समस्याओं से लेकर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था तक के मुद्दे शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के फैसले सीधे तौर पर आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेंगे।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर होगा अंतिम मंथन
रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी है लेकिन इसे लेकर सरकार के भीतर अब भी गहन विचार-विमर्श का दौर जारी है। कैबिनेट की इस बैठक में अधिकारियों के अधिकारों और जिला प्रशासन के साथ उनके तालमेल को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य राजधानी की कानून-व्यवस्था को और अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाना है। बैठक में इस नई व्यवस्था के लागू होने से जनता पर पड़ने वाले असर और प्रशासनिक बदलावों को मंजूरी मिल सकती है।
धान खरीदी की मियाद बढ़ने की उम्मीद
प्रदेश के लाखों किसानों की नजरें इस कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं क्योंकि धान खरीदी की अंतिम तारीख 31 जनवरी पास आ रही है। खराब मौसम और तकनीकी दिक्कतों की वजह से कई जिलों में किसान अब भी अपनी उपज नहीं बेच पाए हैं। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट में धान खरीदी की समय सीमा बढ़ाने और नए टोकन जारी करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। यदि तिथि बढ़ती है तो उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो अब तक केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।
औद्योगिक नीति में संशोधन की तैयारी
राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के मकसद से औद्योगिक नीति में बदलाव किए जा सकते हैं। बैठक में नई औद्योगिक इकाइयों को मिलने वाली रियायतों और लाइसेंस की प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के आसार हैं। सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करना है जिससे स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग हो सके और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिले।
प्रशासनिक तालमेल और विभागीय एजेंडा
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के लंबित प्रस्तावों और पिछली कैबिनेट के निर्णयों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री सभी मंत्रियों से उनके विभागों की प्रगति रिपोर्ट ले सकते हैं। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग में चल रही विकास परियोजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा होने की संभावना है। सरकार का प्रयास है कि बजट सत्र से पहले सभी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों को अंतिम रूप दे दिया जाए।
राजधानी की सुरक्षा का नया रोडमैप
रायपुर में बढ़ते अपराधों और यातायात की समस्याओं को देखते हुए पुलिस कमिश्नर प्रणाली को एक गेम चेंजर माना जा रहा है। कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा होगी कि इस व्यवस्था के आने के बाद मजिस्ट्रेट की शक्तियों और पुलिस की कार्यशैली में किस तरह का संतुलन बनाया जाए। प्रशासन चाहता है कि इस बड़े बदलाव से पहले सभी कानूनी और तकनीकी अड़चनें दूर कर ली जाएं ताकि शहरवासियों को त्वरित न्याय और बेहतर सुरक्षा मिल सके।
निवेश और रोजगार पर सरकार का फोकस
कैबिनेट की इस बैठक का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक सुधारों को समर्पित रहने वाला है। औद्योगिक नीति में होने वाले संशोधन न केवल बड़े उद्योगों बल्कि मध्यम और लघु उद्योगों (MSME) को भी ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। सरकार चाहती है कि स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता मिले और राज्य का राजस्व भी बढ़े। इन फैसलों से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक छवि में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।



