
रायपुर और आसपास के इलाकों में धान परिवहन के नाम पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का बड़ा खेल चल रहा है। राइस मिलर्स और ट्रांसपोर्टर चंद रुपयों का भाड़ा बचाने के लिए आम लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। सहकारी समितियों से निकलने वाले ट्रकों में क्षमता से दोगुना धान भरा जा रहा है। कायदे से एक ट्रक में अधिकतम 25 टन धान लादने की अनुमति है लेकिन सड़कों पर दौड़ रहे इन ट्रकों में 50 टन से भी ज्यादा वजन ढोया जा रहा है। आलम यह है कि विधानसभा और धरसींवा जैसे व्यस्त मार्गों पर दिनभर इन ओवरलोड वाहनों की कतारें देखी जा सकती हैं जो किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं।
तीन मौतों के बाद भी नहीं जागी सरकार
बीते सप्ताह एक ओवरलोड धान ट्रक के कार पर पलट जाने से तीन मासूम लोगों की जान चली गई थी। इस भयावह हादसे के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन सख्त कदम उठाएगा लेकिन हकीकत इसके उलट है। जमीनी पड़ताल में पाया गया कि मंदिर हसौद और पचेड़ा जैसी समितियों से आज भी ओवरलोड ट्रक धड़ल्ले से निकल रहे हैं। गुरुवार को की गई एक जांच में महज एक दिन में 56 ऐसे ट्रक गुजरे जिनका संतुलन बिगड़ा हुआ था। न तो परिवहन विभाग की कोई टीम सड़कों पर जांच करती दिखी और न ही पुलिस ने इन जानलेवा वाहनों को रोकने की जहमत उठाई।
मुंगेली में गिरफ्तारी पर रायपुर में सुस्ती क्यों?
ओवरलोडिंग का यह जाल सिर्फ रायपुर तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में फैला हुआ है। मुंगेली जिले में पुलिस ने हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन राइस मिलर्स को गिरफ्तार किया है। वहां 30 क्विंटल क्षमता वाले छोटे वाहनों में 240 क्विंटल तक धान भरकर ले जाया जा रहा था। जब एक जिले में कार्रवाई हो सकती है तो राजधानी के नाक के नीचे यह अवैध कारोबार कैसे फल-फूल रहा है यह बड़ा सवाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊंचे रसूख वाले राइस मिलर्स के दबाव में अधिकारी आंखें मूंद कर बैठे हैं जिससे सड़कों पर मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
तकनीकी रूप से जानलेवा हैं ये ओवरलोड ट्रक
वाहन विशेषज्ञों का मानना है कि क्षमता से अधिक वजन होने पर ट्रक का ब्रेकिंग सिस्टम और स्टेयरिंग पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। अचानक मोड़ आने या ब्रेक मारने की स्थिति में ये ट्रक ताश के पत्तों की तरह पलट जाते हैं। विधानसभा मार्ग जैसे रास्तों पर जहां दोपहिया और कार सवारों की भारी आवाजाही रहती है वहां इन ट्रकों का चलना किसी सुसाइड मिशन से कम नहीं है। जब तक परिवहन विभाग और पुलिस सख्त चेकिंग अभियान चलाकर इन ट्रकों को जब्त नहीं करते तब तक आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहेगी।
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