
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली ‘बिहान’ (NRLM) योजना की महिला कार्यकर्ताओं का धैर्य अब जवाब दे गया है। कांकेर समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत सीआरपी (CRP) और सक्रिय महिला संघ की सदस्यों ने सोमवार से अपनी मांगों को लेकर आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। महिलाओं का कहना है कि आज के दौर में मात्र ₹1910 के मासिक मानदेय पर गुजारा करना नामुमकिन है। अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति से तंग आकर इन कार्यकर्ताओं ने शासन को ज्ञापन सौंपा और अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है।
आठ सूत्रीय मांगें: न्यूनतम वेतन से लेकर यात्रा भत्ते तक की गुहार
महिला कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को सौंपे गए मांग पत्र में 8 प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया है। उनकी सबसे बड़ी मांग छत्तीसगढ़ न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत सम्मानजनक मानदेय की है। महिलाओं ने शिकायत की है कि उन्हें क्लस्टर और जनपद स्तर की बैठकों में शामिल होने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं, जिसके बदले उन्हें कोई यात्रा भत्ता (TA/DA) नहीं मिलता। इसके अलावा, सारा काम ऐप के जरिए ऑनलाइन होने के बावजूद मोबाइल और इंटरनेट खर्च का बोझ भी उन्हीं के कंधों पर है, जिसके लिए उन्होंने सरकारी मोबाइल या नेट भत्ते की मांग की है।
भविष्य की सुरक्षा: नियमितीकरण और नियुक्ति पत्र का मुद्दा गरमाया
सालों से ‘बिहान’ योजना को जमीन पर उतारने वाली इन महिलाओं ने अब अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग उठाई है। प्रदर्शनकारी महिलाओं की स्पष्ट मांग है कि उन्हें औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी किया जाए और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके अलावा, मानदेय भुगतान में होने वाली 5-6 महीने की देरी पर भी आक्रोश व्यक्त किया गया है। उन्होंने मांग की है कि हर महीने का वेतन सीधे और समय पर उनके बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाना चाहिए।
कड़वा सच: दूसरों को ‘लखपति दीदी’ बनाने वाली खुद पाई-पाई को मोहताज
ज्ञापन में महिलाओं ने सरकार की ‘लखपति दीदी’ योजना पर तंज कसते हुए गहरी नाराजगी जाहिर की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि शासन इस योजना का ढिंढोरा तो पीट रहा है, लेकिन जो महिलाएं दिन-रात मेहनत करके दूसरी ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति’ बना रही हैं, उनकी खुद की सुध लेने वाला कोई नहीं है। बजट में अपने लिए किसी ठोस घोषणा के न होने से ये महिलाएं खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं और उनका कहना है कि सरकारी फाइलों में चमकती योजनाओं के पीछे उनकी अपनी माली हालत बेहद खस्ता है।
उदासीनता का आरोप: आश्वासन से नहीं, अब समाधान से बनेगी बात
सक्रिय महिला संघ की अध्यक्ष पद्मा पाटिल और महासचिव बिंदु यादव ने बताया कि वे जनवरी से लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से भी मुलाकात की, लेकिन वहां से उन्हें सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला। शासन के इस ठंडे रवैये ने महिलाओं को उग्र आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। अब पूरे प्रदेश में ‘बिहान’ कैडर की महिलाओं ने काम ठप कर दिया है, जिससे ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण गतिविधियों पर असर पड़ना तय है।
आर-पार की लड़ाई: मुख्यमंत्री से लेकर कलेक्टर तक को अल्टीमेटम
यह विरोध प्रदर्शन केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे छत्तीसगढ़ में दिख रहा है। आंदोलनकारियों ने अपना ज्ञापन मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और जिला कलेक्टरों को भेज दिया है। महिलाओं ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगों पर लिखित में ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक वे धरने से नहीं उठेंगी। काम बंद होने के कारण अब प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता दिख रहा है।
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