
रायपुर/नई दिल्ली: दुनिया घूमने की हसरत रखने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए इन दिनों स्थितियां काफी पेचीदा हो गई हैं। विदेशों की यात्रा के लिए जरूरी ‘वीजा’ मिलना अब किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। आलम यह है कि लोग अपनी फ्लाइट की टिकटें और महंगे होटल बुक करा चुके हैं, लेकिन ऐन वक्त पर वीजा न मिलने या रिजेक्ट होने के कारण उन्हें घर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस अनिश्चितता ने न केवल यात्रियों की छुट्टियों का मजा किरकिरा किया है, बल्कि टूर एंड ट्रेवल्स बाजार में भी मायूसी पैदा कर दी है। रायपुर सहित देशभर के ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि वीजा मिलने की प्रक्रिया अब पूरी तरह अनुमान पर टिकी है।
हैरान करने वाली स्थिति: एक ही परिवार के दो लोगों का वीजा हुआ मंजूर, दो का आवेदन हुआ खारिज
ट्रैवल इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा चिंता ‘ग्रुप बुकिंग’ और परिवार के साथ यात्रा करने वालों को लेकर देखी जा रही है। दूतावासों से चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं, जहां एक ही घर से आवेदन करने वाले चार सदस्यों में से दो का वीजा अप्रूव हो जाता है, जबकि बाकी दो को बिना किसी ठोस कारण के मना कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में पूरा परिवार संकट में पड़ जाता है क्योंकि आधे सदस्य विदेश नहीं जा सकते और यात्रा कैंसिल करने पर होटल और फ्लाइट का पैसा वापस (रिफंड) नहीं मिल रहा है। इस वजह से लोगों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आंकड़ों में भारी उछाल: पिछले दो सालों में 30 प्रतिशत तक बढ़ गई वीजा रिजेक्शन की दर
टूर ऑपरेटर्स और आंकड़ों की मानें तो पिछले एक-दो सालों के भीतर वीजा खारिज होने की दर में 20 से 30 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूतावासों की ओर से सुरक्षा जांच के कड़े नियमों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। विशेष रूप से यूरोपीय देशों (शेंगेन वीजा) और अमेरिका जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के लिए रिजेक्शन रेट काफी ऊंचा बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि कागजी कार्रवाई में जरा सी भी कमी होने पर दूतावास अब सीधे आवेदन निरस्त कर रहे हैं, जिससे आवेदकों के पास अपील करने का भी समय नहीं बचता।
अमेरिका और यूरोप के लिए लंबी वेटिंग: स्टाफ की कमी और कड़े नियम बने बड़ी बाधा
अमेरिका और यूरोपीय देशों की यात्रा के इच्छुक लोगों के लिए वेटिंग पीरियड भी एक बड़ी समस्या बन गया है। टूर ऑपरेटर्स के मुताबिक, दूतावासों में पर्याप्त स्टाफ न होना और लंबित आवेदनों का ढेर होना इस देरी की मुख्य वजह है। कई देशों के लिए अपॉइंटमेंट मिलने में ही महीनों का समय लग रहा है। सुरक्षा जांच के नाम पर अब आवेदकों की वित्तीय स्थिति और यात्रा के इतिहास को लेकर पहले से कहीं अधिक कड़ाई बरती जा रही है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर पड़ रहा है और लोग मजबूरी में उन देशों का रुख कर रहे हैं जो ‘वीजा ऑन अराइवल’ की सुविधा देते हैं।
खतरे में ट्रैवल इंडस्ट्री: विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, पटरी से उतर सकता है अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार
ट्रैवल एजेंटों और पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संकट के बाद यह इंडस्ट्री बड़ी मुश्किल से संभल पाई थी, लेकिन अब वीजा संकट ने इसे फिर से संकट में डाल दिया है। ट्रैवल एजेंट तन्मय व्यास के अनुसार, अगर वीजा मिलने की प्रक्रिया में जल्द सुधार नहीं हुआ तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार फिर से बेपटरी हो सकता है। दूतावासों की इस सख्ती से न केवल पर्यटकों का भरोसा टूट रहा है, बल्कि टूर ऑपरेटर्स को भी करोड़ों का घाटा उठाना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समस्या का समाधान ढूंढना जरूरी है ताकि पर्यटन व्यवसाय दोबारा संकट में न फंसे।



