
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में 11 महीने से जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को बुधवार को अदालत में पेश किया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट पहुंचे लखमा ने अपनी खराब तबीयत का हवाला देते हुए कहा कि वे बीपी, शुगर और हार्ट के मरीज हैं। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए बाहर भेजा जाए। लखमा ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और जनवरी में गिरफ्तारी के बाद पहली बार उन्हें सशरीर कोर्ट में पेश किया गया है।
खराब सेहत और विधानसभा सत्र का दिया हवाला
कवासी लखमा ने कोर्ट परिसर में मीडिया से बात करते हुए अपना दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि वे लगातार अपनी बीमारियों के बारे में बता रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है, लेकिन जेल में होने के कारण वे जनता की बात सदन में नहीं रख पा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन पर कानून का अपमान करने का भी आरोप लगाया।
क्या है 2161 करोड़ का शराब घोटाला मामला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) छत्तीसगढ़ में हुए कथित ₹2161 करोड़ के शराब घोटाले की गहन जांच कर रही है। यह मामला साल 2019 से 2022 के बीच का है, जब राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। ईडी का आरोप है कि उस दौरान आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा के कार्यकाल में ऐसी लाइसेंस नीति बनाई गई, जिससे अवैध शराब के कारोबार को फायदा पहुंचा और सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी से फिर गरमाया मामला
शराब घोटाले की आंच अब फिर से तेज हो गई है, क्योंकि मंगलवार को ही ईडी ने निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया को इस मामले में गिरफ्तार किया है। सौम्या चौरसिया को कोयला घोटाले में भी मुख्य आरोपी माना गया है। इससे पहले मई में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से कुछ शर्तों पर राहत मिली थी, लेकिन शराब घोटाले में नया मोड़ आने के बाद उनकी मुश्किलें दोबारा बढ़ गई हैं। लखमा और सौम्या दोनों ही इस समय जांच एजेंसी के घेरे में हैं।
अगली सुनवाई पर टिकी सबकी नजरें
कवासी लखमा को फिलहाल दोबारा रायपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। अदालत ने उनकी तबीयत और इलाज की मांग पर संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या पूर्व मंत्री को निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति मिलती है या उन्हें जेल अस्पताल में ही रहना होगा। इस हाई-प्रोफाइल मामले में हो रही लगातार गिरफ्तारियों ने राज्य की सियासत में हड़कंप मचा रखा है।



