
महासमुंद: स्वास्थ्य विभाग में घटिया दवाएं सप्लाई करने के नाम पर चर्चित महासमुंद की कंपनी 9 एम पर अब श्रम विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। औद्योगिक क्षेत्र बिरकोनी स्थित इस कंपनी में श्रम विभाग की चार सदस्यीय जांच टीम ने दस्तावेज और रिकॉर्ड का गहन निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम को पता चला कि प्लेसमेंट मजदूरों का नियमों के विरुद्ध शोषण किया जा रहा था और उन्हें नियत 8 घंटे के बजाय 10 घंटे तक कार्य लिया जा रहा था।
दो शिफ्टों में काम, लेकिन विभाग को दी सिर्फ एक की जानकारी
निरीक्षण के दौरान जांच टीम ने यह भी दर्ज किया कि कंपनी बीते लगभग एक वर्ष से दो शिफ्टों में कार्य करवा रही थी, लेकिन श्रम विभाग को केवल एक शिफ्ट का ही विवरण दिया गया था। मजदूरी से संबंधित कई अन्य बिंदु भी श्रम नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए। श्रम अधिकारी डी. एन. पात्र ने बताया कि ठेकेदार स्तर पर कई जगह पर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।

लाइसेंस 150 मजदूरों का, जबकि काम कर रहे थे 260
जांच में यह बड़ा अनियमितता सामने आई कि ठेकेदार के पास केवल 150 मजदूरों के लिए ही लाइसेंस था, जबकि कंपनी के रिकॉर्ड की जांच में 260 मजदूर दर्ज पाए गए। यानी लाइसेंस से कहीं ज्यादा मजदूरों से बिना वैध दस्तावेजों के काम लिया जा रहा था। श्रम विभाग ने ठेकेदार को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
120 से ज़्यादा महिलाओं ने विधायक से की थी शिकायत
यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब तीन दिन पूर्व कंपनी में पैकेजिंग कार्य से जुड़े कई युवक-युवतियों ने श्रम स्थितियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। ग्राम बिरकोनी के सरपंच चंदन चन्द्राकर ने लगभग 120 महिलाओं को विधायक के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां उन्होंने अपनी समस्याएं बताईं। शिकायत के आधार पर विधायक ने श्रम विभाग के अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए।
वेतन दरों में अंतर और काम से निकालने की धमकी
जांच टीम को कई प्लेसमेंट मजदूरों ने शिकायत की थी कि उनसे 10 घंटे कार्य कराया जाता है और वेतन दरों में भी अंतर है। श्रमिकों का कहना था कि जब वे नियमों का उल्लेख करते, तो उन्हें काम से हटाने की सीधी चेतावनी दी जाती थी। महिलाओं ने नियमित 8 घंटे कार्य और निर्धारित दर पर वेतन प्रदान किए जाने की मांग का ज्ञापन भी दिया था।
कंपनी को व्यवस्था सुधारने के लिए 7 दिन का समय
श्रम विभाग ने कंपनी को सभी अनियमितताओं को दूर करके व्यवस्था सुधारने के लिए सात दिन का समय दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के बाद अगर सुधार नहीं पाया गया, तो कंपनी के खिलाफ नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, कंपनी के स्थायी कर्मचारियों का पीएफ और वेतन विवरण नियमानुसार पाया गया है।



