
छत्तीसगढ़ में रिक्त हो रही राज्यसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सस्पेंस खत्म करते हुए वरिष्ठ नेत्री लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा कर दी है। बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक स्थित ग्राम मु़ड़पार की रहने वाली लक्ष्मी वर्मा का चयन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष अनुशंसा पर किया गया है। भाजपा आलाकमान ने उनके लंबे सांगठनिक अनुभव और जमीनी पकड़ को देखते हुए इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई है। इस फैसले को प्रदेश में महिला नेतृत्व और पिछड़ा वर्ग को सशक्त करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
जमीनी कार्यकर्ता से प्रदेश उपाध्यक्ष तक का सफर
लक्ष्मी वर्मा का भाजपा के साथ जुड़ाव तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है। उन्होंने वर्ष 1990 में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता लेकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वर्ष 2000 में रायपुर के तत्कालीन सांसद रमेश बैस की सांसद प्रतिनिधि नियुक्त होने के बाद उन्होंने संगठन में तेजी से अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने महिला मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और भाजपा पंचायती राज प्रकोष्ठ में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वर्ष 2021 से 2025 तक उन्होंने भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूती दी और गरियाबंद जिले की संगठन प्रभारी व प्रदेश प्रवक्ता का दायित्व भी बखूबी संभाला।
पार्षद से लेकर राज्य महिला आयोग तक का संवैधानिक अनुभव
लक्ष्मी वर्मा के पास केवल संगठन ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और संवैधानिक पदों पर कार्य करने का भी व्यापक अनुभव है। उनके संसदीय और प्रशासनिक सफर की शुरुआत 1994 में रायपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 7 से पार्षद निर्वाचित होने के साथ हुई थी। इसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष की कमान संभाली। केंद्र सरकार में भी उनकी सक्रियता रही, जहां उन्होंने इस्पात मंत्रालय के तहत एफएसएनएल (FSNL) में स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्य किया। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर रही हैं।
सामाजिक कार्यों और मजदूर कल्याण में अग्रणी भूमिका
राजनीति से इतर लक्ष्मी वर्मा सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़ी रही हैं। वर्ष 1998 में उन्होंने ‘शक्ति महिला मंच’ की अध्यक्षता की और 1999 में उन्हें नेहरू युवा केंद्र द्वारा जिला युवा पुरस्कार से नवाजा गया। वे मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई में भी आगे रही हैं, जिसका प्रमाण उनका ‘छत्तीसगढ़ एकता मजदूर कल्याण संघ’ की प्रधान संरक्षक और ‘किसान संघर्ष समिति’ की सदस्यता है। इसके अलावा, वे अखिल भारतीय पंचायत परिषद की राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड की उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी सेवाएं दे रही हैं।
कुर्मी समाज में गहरी पैठ और जातीय समीकरण
लक्ष्मी वर्मा की छत्तीसगढ़ के प्रभावशाली मनवा कुर्मी समाज में जबरदस्त पकड़ मानी जाती है। उन्होंने वर्ष 2000 से 2010 के बीच समाज के भीतर विभिन्न पदों जैसे प्रदेश महिला महामंत्री, संगठन मंत्री और प्रदेश महिला अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वे अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा की महिला राष्ट्रीय महासचिव हैं। उनकी इस सामाजिक सक्रियता और समाज में पैठ ने उन्हें राज्यसभा की दौड़ में सबसे आगे रखा। भाजपा ने उनके चयन के माध्यम से न केवल आधी आबादी को प्रतिनिधित्व दिया है, बल्कि सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है।



