सरकारी स्कूल में व्याख्याता ने बांटी ‘बाइबिल’: मचा हड़कंप, शिक्षा विभाग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

जशपुर जिले के केरसई स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां के एक व्याख्याता पर आरोप है कि उन्होंने क्लास रूम के भीतर छात्र-छात्राओं को धार्मिक पुस्तकें बांटी हैं। इस घटना की जानकारी मिलते ही विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल के प्राचार्य ने संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है।

बिना अनुमति सीधे कक्षा में पहुंचे शिक्षक

यह पूरा घटनाक्रम 10 फरवरी का बताया जा रहा है। विद्यालय के व्याख्याता दीपक तिग्गा उस दिन निर्धारित समय से काफी देर से स्कूल पहुंचे थे। आरोप है कि वे स्कूल आने के बाद सीधे प्राचार्य से मिलने या हाजिरी लगाने के बजाय सीधे कक्षा में चले गए। वहां उन्होंने छात्रों से बातचीत शुरू की और देखते ही देखते बच्चों के बीच बाइबिल की छोटी पुस्तकें बांटनी शुरू कर दीं।

छात्रों के बैग से बरामद हुईं 14 पुस्तकें

जब कुछ बच्चों ने इस बात की जानकारी अपने घर पर दी, तो अभिभावकों ने तुरंत स्कूल पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। शिकायत मिलते ही विद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच की और संदेह होने पर छात्रों के बैग चेक करवाए। जांच के दौरान अलग-अलग बच्चों के पास से कुल 14 नग बाइबिल की पुस्तिकाएं बरामद हुईं। स्कूल प्रबंधन ने इन सभी किताबों को तुरंत अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रख लिया है।

प्राचार्य ने डीईओ को भेजी रिपोर्ट

विद्यालय के प्राचार्य ने इस घटना को अनुशासनहीनता और सरकारी नियमों का उल्लंघन माना है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को एक विस्तृत पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी है। पत्र में शिक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। प्राचार्य का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की गतिविधि कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी क्योंकि यह स्कूल के माहौल को प्रभावित करती है।

सरकारी स्कूल में धार्मिक प्रचार पर पाबंदी

शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी शासकीय विद्यालय परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा किसी भी धर्म विशेष का प्रचार-प्रसार करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। स्कूल प्रबंधन ने नोटिस में शिक्षक से यह पूछा है कि आखिर किस अनुमति के तहत और किस उद्देश्य से उन्होंने कक्षा में इन पुस्तकों का वितरण किया। विभाग का स्पष्ट कहना है कि सरकारी स्कूल सभी धर्मों के सम्मान और निष्पक्ष शिक्षा के केंद्र होते हैं।

जांच के बाद होगी बड़ी कार्रवाई

स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों का काम बच्चों को विषय का ज्ञान देना है, न कि किसी खास विचारधारा की ओर प्रेरित करना। फिलहाल शिक्षक के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने संकेत दिए हैं कि जांच रिपोर्ट और स्पष्टीकरण संतोषजनक न होने की स्थिति में शिक्षक को निलंबित भी किया जा सकता है।

Also Read: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण कानून पर ‘सुप्रीम’ अड़चन: बजट सत्र में विधेयक पेश करने पर संशय, जानें क्या हैं नए कड़े प्रावधान

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button