
रायपुर में स्वास्थ्य विभाग की 650 पदों की भर्ती शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। स्वास्थ्य संचालनालय ने इस मामले में हाईकोर्ट में केविएट दाखिल कर दी है। इसका सीधा मतलब है कि अगर कोई अभ्यर्थी इस भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ कोर्ट जाता है तो अदालत कोई भी आदेश देने से पहले सरकार का पक्ष जरूर सुनेगी। विभाग को अंदेशा है कि चयन प्रक्रिया को लेकर छात्र कानूनी चुनौती दे सकते हैं इसलिए सरकार ने पहले ही अपना बचाव कर लिया है।
किन पदों पर होनी है सीधी भर्ती
स्वास्थ्य विभाग ने अगस्त 2024 में इन भर्तियों का आदेश जारी किया था। इसके तहत स्टाफ नर्स, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (महिला और पुरुष), फार्मासिस्ट ग्रेड-2 और लैब टेक्नीशियन के कुल 650 पदों को भरा जाना है। इसमें वार्ड बॉय, वार्ड आया और ड्रेसर जैसे पदों के लिए भी प्रक्रिया चल रही है। इन परीक्षाओं का आयोजन व्यापम ने किया था और अब चयन सूची के आधार पर नियुक्तियां दी जानी हैं।
पुरानी गड़बड़ियों से डरे हुए हैं अभ्यर्थी
स्वास्थ्य विभाग की भर्ती परीक्षाओं का विवादों से पुराना नाता रहा है। पिछले कुछ सालों में कई बार रिजल्ट जारी होने के बाद मेरिट सूची में धांधली के आरोप लगे हैं। स्टाफ नर्स और ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक की परीक्षा के समय कई उम्मीदवारों ने शिकायत की थी कि ज्यादा नंबर होने के बाद भी उनका नाम लिस्ट में नहीं आया। इन विवादों की वजह से ही उम्मीदवारों के बीच अविश्वास का माहौल बना हुआ है और उन्हें पारदर्शिता की कमी खल रही है।
आरक्षण और अंकों के खेल पर भी उठ रहे सवाल
फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन जैसी परीक्षाओं के नतीजों में भी आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। अभ्यर्थियों ने आरक्षण के नियमों और अतिरिक्त अंक जोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। हालांकि विभाग ने इन शिकायतों को तकनीकी गलती बताकर पल्ला झाड़ लिया था लेकिन छात्रों का विरोध पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। यही वजह है कि नई भर्ती प्रक्रिया के अंतिम दौर में पहुंचते ही कानूनी दांव-पेंच शुरू हो गए हैं।
भर्ती अटकी तो चरमरा जाएगी स्वास्थ्य व्यवस्था
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल लंबे समय से कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है जहां स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी स्टाफ तक नहीं है। यह भर्ती प्रक्रिया इन अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए बहुत जरूरी है। अगर मामला कोर्ट में खिंच गया तो नियुक्तियों में लंबी देरी हो सकती है जिसका सीधा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ेगा।
सिस्टम की साख अब दांव पर
650 पदों की यह भर्ती अब केवल सरकारी नौकरी का मामला नहीं रह गई है बल्कि यह विभाग की साख की परीक्षा बन चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर चयन प्रक्रिया पूरी तरह साफ है तो सरकार को कानूनी कवच लेने की जरूरत क्यों पड़ी। विभाग को चाहिए कि वह छात्रों के मन में बैठे संदेह को दूर करे ताकि नियुक्तियां बिना किसी रुकावट के समय पर पूरी हो सकें।



