
राजनांदगांव जिले की गठुला सोसाइटी में आज धान बेचने पहुंचे किसानों की भीड़ लगी रही। लगभग एक सप्ताह के बाद ऑफलाइन टोकन व्यवस्था फिर से शुरू हुई, जिसके कारण सुबह से ही किसान लाइन में खड़े नजर आए। कई किसानों को टोकन के लिए काफी समय इंतजार करना पड़ा।
अलग अलग सोसाइटियों में वजन को लेकर विवाद
किसानों ने बताया कि धान के कट्टों का वजन हर सोसाइटी में अलग निकल रहा है। निर्धारित वजन 40 किलो 500 ग्राम होना चाहिए। इसमें बोरे का वजन भी शामिल रहता है। लेकिन कन्हारपुरी सोसाइटी में एक कट्टा 41 किलो 700 ग्राम, ढाबा सोसाइटी में 40 किलो 700 ग्राम और गठुला सोसाइटी में 40 किलो 900 ग्राम तौला जा रहा है। किसानों का कहना है कि इस अंतर से उन्हें नुकसान हो रहा है।
तौल प्रक्रिया पर सवाल
किसानों के अनुसार तौल मशीनों में गड़बड़ी या वजन तय करने वाली प्रक्रिया में लापरवाही हो सकती है। कई किसान बार बार तौल कराने की मांग कर रहे हैं। केंद्रों पर कर्मचारियों को भी दबाव की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। किसान चाहते हैं कि वजन मानक के अनुसार ही तय किया जाए।
खरीदी केंद्रों में धान आवक बढ़ी
धान की बफर मात्रा आने के बाद समितियों ने खरीदी और परिवहन की गति बढ़ाई है। ढाबा सोसाइटी में पंजीकृत 1800 किसानों में से अब तक 497 किसानों का धान खरीदा जा चुका है। लगातार बढ़ती आवक से कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ा है।
किसान पारदर्शिता की मांग कर रहे
किसानों का कहना है कि खरीदी सीजन में उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलना जरूरी है। वे चाहते हैं कि वजन मानक एक समान हो और टोकन प्रक्रिया सुचारू चले। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी सोसाइटी में तौल व्यवस्था की जांच की जाए ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
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