
बीजापुर जिले में हुए बहुचर्चित सड़क निर्माण घोटाले में छत्तीसगढ़ सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव के निर्देश पर जारी इस आदेश के तहत कार्यपालन अभियंता (EE) हरनारायण पात्र और दो अनुविभागीय अधिकारी (SDO) प्रमोद सिंह तंवर व संतोष दास को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इन अधिकारियों पर कर्तव्यों में लापरवाही और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। निलंबन की अवधि के दौरान इनका मुख्यालय नवा रायपुर स्थित ‘निर्माण भवन’ तय किया गया है। शासन की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तौर पर देखा जा रहा है।
कागजों पर बन गई सड़क: जांच में खुली भ्रष्टाचार की पोल
मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, बीजापुर के नेलसनार–कोडोली–मिरतुल–गंगालुर मार्ग के निर्माण में बड़े पैमाने पर धांधली पाई गई है। जांच में खुलासा हुआ कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई हिस्सों में काम सिर्फ कागजों पर ही पूरा दिखाकर भुगतान कर दिया गया। फर्जी माप पुस्तिका (MB) तैयार कर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया गया है। इस मामले में गंगालुर थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला भी दर्ज किया गया है।

पत्रकार मुकेश चंद्राकर ने उठाया था मुद्दा: सच दिखाने की मिली खौफनाक सजा
इस पूरे घोटाले की परतें खोलने में स्थानीय पत्रकार मुकेश चंद्राकर की अहम भूमिका रही। मुकेश ने इस सड़क परियोजना में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर लगातार निडर रिपोर्टिंग की थी। उनकी खबरों ने विभाग और ठेकेदारों के गठजोड़ को बेनकाब कर दिया था। हालांकि, इस साहस की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। भ्रष्टाचार के खुलासे के कुछ समय बाद ही उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था और पत्रकार संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी। माना जा रहा है कि इन अधिकारियों पर कार्रवाई इसी हत्याकांड और घोटाले की जांच की एक अहम कड़ी है।
फॉरेंसिक जांच के घेरे में दस्तावेज: और भी अधिकारी रडार पर
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई तो महज एक शुरुआत है। सड़क निर्माण से जुड़े तकनीकी स्वीकृतियों, बिलों और माप पुस्तिकाओं की अब फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि भ्रष्टाचार का यह नेटवर्क कितना गहरा है और इसमें शासन के किन अन्य ऊंचे पदों पर बैठे लोगों का संरक्षण शामिल था। जैसे-जैसे डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले में शामिल कुछ और इंजीनियरों, क्लर्कों और बड़े ठेकेदारों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
सरकार का सख्त संदेश: भ्रष्टाचार और हिंसा बर्दाश्त नहीं
प्रदेश सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि जनहित के पैसों की लूट और सच्चाई दबाने के लिए की गई हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के बाद उपजे जनाक्रोश और प्रशासनिक साख को बचाने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस उन असल चेहरों तक पहुंच पाएगी जिन्होंने सड़क के पैसों के लिए एक पत्रकार की आवाज को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। विभाग में चल रही इस सफाई प्रक्रिया से अन्य लापरवाह अधिकारियों के बीच भी हड़कंप मचा हुआ है।



