
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में जांच का दायरा अब और बढ़ गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा यानी ईओडब्ल्यू ने पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट में आवेदन पेश करने के बाद यह कार्रवाई की गई है। अदालत ने सौम्या को 16 जनवरी तक के लिए ईओडब्ल्यू की रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच टीम शराब घोटाले की कड़ियों और पैसों के लेनदेन को लेकर उनसे विस्तार से पूछताछ करेगी। इससे पहले सौम्या चौरसिया ने हाई कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी जिसे अदालत ने 13 जनवरी को खारिज कर दिया था।
अफसरों और नेताओं की मिलीभगत का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह बात सामने आई थी कि राज्य में करीब 2100 करोड़ रुपये से अधिक का शराब घोटाला हुआ है। आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान एक संगठित गिरोह काम कर रहा था जिसमें कई बड़े अधिकारी और नेता शामिल थे। इस सिंडिकेट ने अवैध तरीके से शराब की बिक्री और कमीशन के जरिए भारी मुनाफा कमाया। एसीबी ने इस मामले में लगभग 70 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है जिसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा का नाम भी शामिल है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस भ्रष्टाचार का पैसा सीधे तौर पर प्रभावशाली लोगों तक पहुंचता था।
संपत्तियां कुर्क होने से बढ़ीं मुश्किलें
सौम्या चौरसिया पर केवल शराब घोटाला ही नहीं बल्कि कोयला लेवी मामले में भी शिकंजा कसा हुआ है। हाल ही में जांच एजेंसी ने उनकी करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। सीज की गई इन संपत्तियों में कीमती जमीनों के टुकड़े और रिहायशी फ्लैट शामिल हैं जिनकी बाजार में कीमत 2 करोड़ 66 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। एजेंसियों का मानना है कि भ्रष्टाचार के जरिए जुटाई गई रकम को इन संपत्तियों में निवेश किया गया था। ईओडब्ल्यू की इस नई गिरफ्तारी के बाद घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।



