
रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब अपनी माटी की महान हस्तियों और गौरवशाली इतिहास से रूबरू होंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी पूरी कर ली है। नए सिलेबस में छत्तीसगढ़ की लोक कला और परंपराओं को प्रमुखता दी गई है। अब कक्षा 7वीं के छात्र हिंदी की किताब में विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजनबाई की जीवनी और उनके संघर्ष की कहानी पढ़ेंगे। इसके अलावा, अंग्रेजी की किताबों में नगालैंड के त्योहारों की जगह अब छत्तीसगढ़ के पारंपरिक सुआ नृत्य को शामिल किया गया है, ताकि बच्चे अपनी संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकें।
इतिहास और भूगोल का नया रंग: चौथी की अंग्रेजी में सिरपुर का वर्णन और संस्कृत में पढ़ाई जाएगी महानदी की गाथा
पाठ्यक्रम में केवल भाषा ही नहीं, बल्कि इतिहास और विज्ञान जैसे विषयों में भी स्थानीय छौंक लगाया गया है। कक्षा चौथी के बच्चों को अब अंग्रेजी के पाठ्यक्रम में विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल सिरपुर का इतिहास पढ़ाया जाएगा। वहीं, संस्कृत विषय में छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा मानी जाने वाली महानदी के महत्व और उसके पौराणिक संदर्भों को शामिल किया गया है। एससीईआरटी के अधिकारियों के मुताबिक, हिंदी, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण और विज्ञान विषयों में लगभग 10 प्रतिशत तक बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों को अपने राज्य की भौगोलिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ना है।
NCRT के पैटर्न पर होगा नया सिलेबस: अंग्रेजी माध्यम की तैयारी पूरी, हिंदी की किताबों का इंतजार
एससीईआरटी के विशेषज्ञों ने साफ किया है कि पाठ्यक्रम में बदलाव स्थानीय जरूर हैं, लेकिन इसका स्टैंडर्ड और पैटर्न पूरी तरह राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के अनुरूप ही रहेगा। एससीईआरटी के कौस्तुभ बनर्जी के अनुसार, किताबों में दिए जाने वाले अभ्यास प्रश्न और मूल्यांकन का तरीका भी एनसीईआरटी की तर्ज पर ही होगा। वर्तमान में अंग्रेजी माध्यम की एनसीईआरटी किताबें उपलब्ध हो गई हैं, जिसके आधार पर सिलेबस तैयार करने के लिए वर्कशॉप शुरू हो चुकी है। जैसे ही हिंदी माध्यम की किताबें प्राप्त होंगी, उनके आधार पर भी बदलाव की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
बचपन में घुलेंगी छत्तीसगढ़ी कविताएं: पहली की बारहखड़ी में बदलाव, गणित और विज्ञान में भी दिखेगी नई शिक्षा नीति की झलक
नए पाठ्यक्रम में छोटे बच्चों के लिए पढ़ाई को और अधिक रोचक बनाया जा रहा है। कक्षा चौथी की हिंदी किताब में पहली बार छत्तीसगढ़ी कविताओं को स्थान दिया जा रहा है। वहीं, कक्षा पहली की बारहखड़ी के पाठों में भी बदलाव किया गया है ताकि बच्चों को अक्षरों की पहचान आसानी से हो सके। पहली और दूसरी कक्षा के लिए विशेष ‘इमली’ (श्रुतिलेख अभ्यास) तैयार की जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के निर्देशों का पालन करते हुए गणित विषय में भी तार्किक बदलाव किए गए हैं, जिससे बच्चों में रटने की जगह समझने की प्रवृत्ति बढ़े।
अन्य राज्यों की संस्कृति का भी होगा संगम: छत्तीसगढ़ के साथ देशभर की परंपराओं का ज्ञान लेंगे छात्र
हालांकि सिलेबस में छत्तीसगढ़ को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन विशेषज्ञों ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि छात्र बाहरी दुनिया से न कटें। एससीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि किताबों में सवाल इस तरह तैयार किए जा रहे हैं जिससे छात्रों को देश के अन्य राज्यों की संस्कृति, खान-पान और परंपराओं की भी पर्याप्त जानकारी मिले। इसके लिए आयोजित वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने एक ऐसा संतुलन बनाने की कोशिश की है, जहां छात्र अपनी जड़ों से जुड़े रहें और साथ ही एक वैश्विक नागरिक के रूप में भी तैयार हों। नए सत्र की किताबें अब अधिक रंगीन, सूचनात्मक और स्थानीय संदर्भों से भरपूर होंगी।



