
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना’ में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी सिस्टम की खामियों और दलालों की सक्रियता का फायदा उठाकर मृत व्यक्तियों के नाम पर लाखों रुपये की सहायता राशि हड़पने का खेल खेला जा रहा है। जांजगीर जिला भाजपा उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया ने इस पूरे घोटाले का खुलासा करते हुए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी है। इस खुलासे ने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मौत के बाद हुआ श्रमिक पंजीयन और फिर दिखाई ‘दोबारा’ मौत
इस घोटाले की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) बेहद चौंकाने वाली है। शिकायत के अनुसार, बम्हनीडीह विकासखंड की निवासी सुमन बाई पटेल की वास्तविक मृत्यु 27 नवंबर 2024 को हो चुकी थी। इसके बावजूद, दलालों और विभागीय मिलीभगत से 9 दिसंबर 2024 को उनका नया पंजीयन श्रमिक के रूप में पोर्टल पर दर्ज किया गया। हद तो तब हो गई जब उनकी वास्तविक मौत के सात महीने बाद, 2 जून 2025 को उन्हें कागजों पर दोबारा मृत घोषित कर दिया गया। इस फर्जीवाड़े के लिए बाकायदा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी तैयार किया गया, ताकि सरकारी खजाने से पैसा निकाला जा सके।
फर्जी दस्तावेजों के दम पर ₹1,00,000 की सरकारी राशि का गबन
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासन द्वारा दी जाने वाली ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की मृत्यु सहायता राशि संबंधित बैंक खाते में सफलतापूर्वक ट्रांसफर भी कर दी गई। गगन जयपुरिया का आरोप है कि बिना भौतिक सत्यापन और विभागीय अधिकारियों के संरक्षण के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि गरीबों के हक की राशि डकारने के लिए एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जिसमें निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर उच्चाधिकारी तक शामिल हो सकते हैं।
श्रम विभाग में दलालों का बोलबाला और दर्जनों संदिग्ध मामले
शिकायतकर्ता का दावा है कि सुमन बाई का मामला तो महज एक बानगी है; श्रम विभाग में ऐसे दर्जनों मामले दबे हुए हैं जहाँ अपात्रों या मृत व्यक्तियों के नाम पर राशि निकाली गई है। जिले भर में फैले दलालों का जाल सीधे श्रम विभाग के दफ्तरों तक जुड़ा हुआ है, जो कागजी हेरफेर कर अपात्र फाइलों को पास करा देते हैं। भाजपा उपाध्यक्ष ने मांग की है कि जिले में पिछले एक साल के दौरान स्वीकृत हुए सभी मृत्यु सहायता प्रकरणों की विशेष जांच और ऑडिट कराई जाए, ताकि घोटाले की वास्तविक गहराई का पता चल सके।
दोषियों पर FIR और राशि रिकवरी की उठी मांग
प्रशासन को सौंपी गई शिकायत में दोषियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही, गबन की गई सरकारी राशि की वसूली (Recovery) संबंधित दोषियों से करने और उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की बात कही गई है। गगन जयपुरिया ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में लीपापोती की गई, तो वे इस लड़ाई को और आगे ले जाएंगे। फिलहाल, जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश दिए हैं, जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।



