
रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार में कोयला खदान के विरोध के दौरान हुई हिंसा मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। महिला आरक्षक के साथ हुई बर्बरता और कपड़े फाड़ने के शर्मनाक मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल ने साफ कर दिया है कि वर्दी पर हाथ उठाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और मौके पर मौजूद सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य दंगाइयों की शिनाख्त कर रही है। पकड़े गए आरोपियों पर गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है और जल्द ही अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
खदान के विरोध में सुलग उठा तमनार: जनसुनवाई के बाद 12 दिसंबर से धरने पर थे 14 गांवों के लोग
इस पूरे फसाद की शुरुआत जिंदल कोयला खदान (गारे पेलमा सेक्टर-1) के विस्तार के विरोध से हुई। 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में हुई जनसुनवाई के बाद से ही कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण लामबंद थे। ग्रामीण खदान को निरस्त करने की मांग को लेकर 12 दिसंबर से लगातार धरने पर बैठे थे। 27 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे हालात तब तनावपूर्ण हो गए जब सैकड़ों प्रदर्शनकारी लिबरा चौक पर जमा हो गए और चक्काजाम कर दिया। प्रशासन और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन दोपहर होते-होते भीड़ एक हजार के पार पहुंच गई और माहौल बिगड़ने लगा।
दोपहर ढाई बजे आउट ऑफ कंट्रोल हुए हालात: पुलिस पर पत्थरबाजी और थाना प्रभारी से मारपीट
शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा प्रदर्शन दोपहर करीब ढाई बजे हिंसक झड़प में बदल गया। उग्र भीड़ ने पुलिस के बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका और सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम को भी महिलाओं के एक गुट ने घेरकर पीटा। इसी बीच भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवियों ने महिला आरक्षक के साथ अभद्रता की और उनके कपड़े फाड़ दिए। इस हमले में कई पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हुए, जिन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाना पड़ा। प्रशासन का कहना है कि माइक से शांति की बार-बार अपील के बावजूद भीड़ सुनने को तैयार नहीं थी।
सरकारी वाहनों में लगाई आग और प्लांट में तोड़फोड़: करोड़ों की संपत्ति को पहुंचाया नुकसान
पुलिस को पीछे धकेलने के बाद उपद्रवी और भी ज्यादा हिंसक हो गए। मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस को आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारी जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की तरफ बढ़ गए। वहां घुसकर दंगाइयों ने कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टरों और दफ्तर के उपकरणों में तोड़फोड़ कर आगजनी की। प्लांट के दफ्तर को भी पूरी तरह तहस-नहस कर दिया गया। इस हिंसा का एक वीडियो चार दिन बाद वायरल हुआ, जिसमें महिला आरक्षक के साथ हुई बर्बरता साफ दिखाई दे रही है, जिसने पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है।
बैकफुट पर जिंदल प्रबंधन: हिंसा के बाद प्रस्तावित कोल ब्लॉक की जनसुनवाई रद्द करने का फैसला
तमनार में हुए इस खूनी संघर्ष और जन आक्रोश को देखते हुए जिंदल कंपनी प्रबंधन ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने फिलहाल प्रस्तावित गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए जनसुनवाई नहीं करने की घोषणा की है। ग्रामीणों की मुख्य मांग यही थी कि इस खदान के विस्तार को रोका जाए। हालांकि, खदान का काम रुकने के बावजूद पुलिस उन लोगों की तलाश में जुटी है जिन्होंने कानून हाथ में लिया और महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की। इलाके में फिलहाल भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।



