
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बेहद दुखद और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर में बीती रात चोरों ने धावा बोलकर लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण पार कर दिए। शनिवार सुबह जब मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु पट खोलने पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मंदिर का ताला टूटा हुआ था और गर्भगृह से माता के कीमती गहने गायब थे। इस बड़ी वारदात की खबर फैलते ही पूरे शहर में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर के बाहर जमा हो गए।
पीछे का दरवाजा तोड़कर घुसे थे शातिर चोर
शुरुआती जांच में पता चला है कि चोरों ने मंदिर में दाखिल होने के लिए पीछे के रास्ते का इस्तेमाल किया। उन्होंने पीछे का दरवाजा तोड़कर आधी रात के सन्नाटे में मंदिर के भीतर प्रवेश किया। चोरों ने बहुत ही शातिराना तरीके से केवल कीमती आभूषणों को निशाना बनाया। पुजारी की सूचना पर पुलिस के आला अधिकारी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम मौके पर पहुंच गई है। फिलहाल पुलिस ने जांच पूरी होने तक मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया है ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
सीसीटीवी और फोरेंसिक टीम के भरोसे पुलिस
पुलिस अब मंदिर परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि चोरों के हुलिए और उनके भागने के रास्ते का सुराग मिल सके। डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम ने मौके से उंगलियों के निशान और अन्य तकनीकी सबूत जुटाए हैं। हालांकि चोरी हुए आभूषणों की सटीक कीमत का आकलन अभी किया जा रहा है, लेकिन मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि गायब हुए गहनों की कीमत लाखों रुपये में है। बस्तर पुलिस ने शहर के बाहर जाने वाले रास्तों पर नाकेबंदी कर दी है और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है।
52 शक्तिपीठों में से एक है दंतेश्वरी मंदिर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दंतेवाड़ा का यह मंदिर देश के 52 पवित्र शक्तिपीठों में गिना जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े किए थे, तब यहां उनका ‘दांत’ गिरा था। इसी वजह से इस पावन धाम का नाम दंतेवाड़ा और माता का नाम दंतेश्वरी पड़ा। जगदलपुर का यह मंदिर बस्तर के लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है और यहां हुई इस चोरी ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है।
काकतीय वंश और राजा अन्नम देव से जुड़ा इतिहास
इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व बस्तर के काकतीय राजवंश से गहराई से जुड़ा है। 14वीं शताब्दी में वारंगल (वर्तमान तेलंगाना) से आए राजा अन्नम देव ने बस्तर में काकतीय वंश की स्थापना की थी। लोक कथाओं के अनुसार मां दंतेश्वरी स्वयं राजा के साथ बस्तर आई थीं। माता ने शर्त रखी थी कि राजा आगे चलेगा और वे पीछे, लेकिन जहां राजा ने पीछे मुड़कर देखा, वे वहीं रुक जाएंगी। शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर राजा के पीछे मुड़ते ही माता वहीं स्थापित हो गईं, जो आज दंतेवाड़ा का मुख्य मंदिर है।
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे का मुख्य केंद्र
जगदलपुर का यह मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थल नहीं है, बल्कि यह विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा का केंद्र बिंदु भी है। 75 दिनों तक चलने वाले दुनिया के इस सबसे लंबे त्योहार के दौरान माता की ‘डोली’ को विशेष सम्मान के साथ दंतेवाड़ा से जगदलपुर लाया जाता है। पूरा उत्सव माता दंतेश्वरी की आराधना के इर्द-गिर्द घूमता है। मंदिर में हुई इस चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह मंदिर राजमहल परिसर के काफी करीब स्थित है।
सुरक्षा इंतजामों पर उठ रहे सवाल
मंदिर जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थान पर इतनी बड़ी चोरी होना पुलिस की गश्त और मंदिर की निजी सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चोरों को मंदिर के रास्तों की पूरी जानकारी थी, तभी वे इतनी आसानी से अंदर दाखिल होने और वारदात को अंजाम देने में सफल रहे। पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर माता के गहने बरामद कर लिए जाएंगे। शहरवासियों ने मांग की है कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों पर सुरक्षा के और कड़े इंतजाम किए जाने चाहिए।



