
Manendragarh Fertilizer Scam Warehouse Sealed Investigation: छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से खाद वितरण में एक बड़ी धांधली का मामला सामने आया है। ‘सुशासन तिहार’ के दौरान ग्रामीणों से मिली गंभीर शिकायतों के बाद प्रशासन ने जिल्दा ग्राम स्थित आदिम जाति सहकारी समिति के खाद गोदाम को सील कर दिया था। जब कृषि विभाग और राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम जांच करने पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। गोदाम के रिकॉर्ड और जमीनी स्टॉक में भारी अंतर मिला है। इस बीच ग्रामीणों ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि पकड़े जाने के डर से समिति प्रबंधन ने रातों-रात एक गुप्त कमरे में खाद की सैकड़ों बोरियां भर दीं ताकि कमी को छिपाया जा सके।

ग्रामीणों की शिकायत पर एक्शन, विधायक के पहुंचने से पहले भागा प्रबंधक
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब इलाके में आयोजित सरकारी समाधान शिविर में किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने समिति प्रबंधक अखिलचंद सिंह पर खाद वितरण में मनमानी और कालाबाजारी के सीधे आरोप मढ़े। शिकायत मिलते ही तहसीलदार और कृषि अधिकारियों की टीम को मौके पर रवाना किया गया। इस दौरान क्षेत्रीय भाजपा विधायक भैयालाल रजवाड़े भी स्थिति का जायजा लेने गोदाम पहुंचे। हालांकि, वीआईपी और अधिकारियों के आने भनक लगते ही समिति प्रबंधक गोदाम में ताला जड़कर मौके से रफूचक्कर हो गया। इसके बाद तहसीलदार ने मुस्तैदी दिखाते हुए खाद से भरे चारों कमरों को सरकारी सील लगा दी थी।

सील खुली तो सामने आई हकीकत, बेतरतीब ढंग से छिपाया गया था स्टॉक
अगले दिन जब तहसीलदार और कृषि विभाग के आला अफसरों की मौजूदगी में चारों कमरों की सील तोड़ी गई, तो भीतर का नजारा अव्यवस्थित था। किसानों को बांटे जाने वाले यूरिया और डीएपी का भंडारण बेहद लापरवाही से किया गया था। जांच टीम ने पाया कि सरकारी कागजों में जितनी खाद दर्ज थी, गोदाम में उतनी बोरियां मौजूद नहीं थीं। भौतिक सत्यापन से बचने के लिए बोरियों को इस तरह से जमाया गया था कि उनकी गिनती आसानी से न की जा सके। इस अव्यवस्था ने अधिकारियों के शक को यकीन में बदल दिया कि यहां लंबे समय से खेल चल रहा था।
रातों-रात गुप्त कमरे में खाद डंप करने का खुलासा, जमीन पर बिखरे मिले सबूत
जांच के दौरान ही ग्रामीणों ने अधिकारियों का ध्यान एक अन्य बंद कमरे की ओर खींचा। ग्रामीणों का दावा है कि सील लगने के बाद भी पिछले दरवाजे से रातों-रात इस नए कमरे में खाद की बोरियां लाकर डंप की गईं ताकि कुल स्टॉक को बराबर दिखाया जा सके। इस दावे को बल तब मिला जब उस कमरे के बाहर और जमीन पर यूरिया के दाने बिखरे हुए पाए गए। हड़बड़ी में किए गए इस काम के निशान साफ नजर आ रहे थे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि जांच को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की गई है।

यूरिया और डीएपी का मिश्रण, कागजों के मुकाबले स्टॉक में बड़ा अंतर
जांच दल में शामिल कृषि विभाग के SDO धनंजय सोनी ने बताया कि गोदाम के भीतर खाद का रखरखाव पूरी तरह गैर-तकनीकी और नियमों के खिलाफ था। यूरिया के ढेरों के बीच डीएपी और पोटाश की बोरियां भी मिला दी गई थीं। शुरुआती नपती में जो आंकड़े सामने आए हैं वे बेहद चौंकाने वाले हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गोदाम में 71.5 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन मौके पर केवल 54 मीट्रिक टन ही मिला। इसी तरह एनपीके, पोटाश और एसएसपी खाद की खेप में भी बड़ी शॉर्टेज पाई गई है।
खाद की जगह मिलीं भूसे की बोरियां, कलेक्टर को भेजी जा रही है रिपोर्ट
कृषि अधिकारियों के मुताबिक, मामले में जालसाजी का स्तर यह था कि वजन और आकार बराबर दिखाने के लिए खाद की बोरियों के पीछे भूसे से भरी बोरियां छिपाकर रखी गई थीं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। SDO ने कहा कि वास्तविक नुकसान और हेरफेर का सटीक पता तभी चलेगा जब पूरी खाद को बाहर निकालकर एक-एक बोरी की अलग से गिनती की जाएगी। जांच टीम इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला कलेक्टर को सौंप रही है, जिसके आधार पर समिति प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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