
छत्तीसगढ़ सरकार ने दिव्यांगजनों को स्वावलम्बी बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य शासन ने सभी सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, आयोगों और बोर्डों की सेवाओं के समस्त प्रवर्गों में दिव्यांगों के लिए पदों को चिन्हित कर राजपत्र (Gazette) में अधिसूचित कर दिया है। समाज कल्याण विभाग को इस प्रक्रिया के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया था। साल 2018 से लंबित इस महत्वपूर्ण कार्य को अब अंतिम रूप देते हुए 64 पृष्ठों की विस्तृत सूची जारी की गई है, जिससे अब दिव्यांगजनों के लिए सरकारी नौकरियों के द्वार अधिक स्पष्टता के साथ खुल सकेंगे।
विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा और मुख्य सचिव का अनुमोदन
समाज कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह कार्रवाई ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ की धारा 33 के तहत की गई है। इस प्रक्रिया के लिए प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों का सूक्ष्मता से परीक्षण किया गया। विशेषज्ञ समिति ने 23 फरवरी को अपनी अंतिम अनुशंसाएं प्रस्तुत की थीं, जिस पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने अपनी मुहर लगाई। इस विस्तृत सूची में यह स्पष्ट किया गया है कि किस विभाग में कौन सा पद किस प्रकार की दिव्यांगता (जैसे दृष्टिबाधित, अस्थिबाधित या श्रवणबाधित) के लिए उपयुक्त और आरक्षित होगा।

पदोन्नति के पदों के लिए ‘स्वमेव चिन्हांकन’ का नया नियम
अधिसूचना में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान ‘पोषक वर्ग’ (Feeder Cadre) को लेकर किया गया है। शासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई निचला पद (पोषक पद) किसी विशेष श्रेणी के दिव्यांगजन के लिए चिन्हित है, तो उस पद से पदोन्नत होने वाला अगला पद (Promotional Post) भी उसी श्रेणी के दिव्यांगजन के लिए ‘स्वमेव’ (Automatically) चिन्हित माना जाएगा। इस नियम से दिव्यांग कर्मचारियों को भविष्य में पदोन्नति प्राप्त करने में आने वाली तकनीकी बाधाएं दूर हो जाएंगी और उन्हें अपने करियर में आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त होंगे।
मेडिकल बोर्ड द्वारा शारीरिक दक्षता और प्रमाण पत्र का अनिवार्य सत्यापन
शासकीय सेवा में नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। नियुक्ति के समय राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा संबंधित उम्मीदवार की शारीरिक दक्षता की गहन जांच की जाएगी। साथ ही, अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत दिव्यांगता प्रमाण पत्र की प्रमाणिकता की पुष्टि करना अनिवार्य होगा। इन दोनों प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद ही संबंधित विभाग उम्मीदवार की उपयुक्तता की अंतिम जांच करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि आरक्षण का लाभ केवल वास्तविक और पात्र उम्मीदवारों को ही प्राप्त हो।
बेंचमार्क दिव्यांगता और तत्काल प्रभाव से आरक्षण का लाभ
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि सीधी भर्ती के दौरान आरक्षण का लाभ केवल उन व्यक्तियों को दिया जाएगा जिनके पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ‘स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र’ होगा और जो ‘बेंचमार्क दिव्यांगता’ (40% या उससे अधिक) की श्रेणी में आते होंगे। यह नई व्यवस्था और पदों की सूची तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दी गई है। इस निर्णय से आने वाले समय में निकलने वाली सरकारी भर्तियों में दिव्यांगजनों के लिए पदों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट रहेगी और भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी आएगी।



