
धमतरी जिले में मध्यान्ह भोजन बनाने वाली रसोइयों और सहायिकाओं ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। मानदेय में 50 प्रतिशत की वृद्धि और समान काम-समान वेतन जैसी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ये कर्मी पिछले चार दिनों से हड़ताल पर डटे हुए हैं। धमतरी के गांधी चौक पर धरना दे रही महिलाओं का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मिलने वाला 2000 रुपये का मासिक मानदेय ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इतनी कम राशि में बढ़ती महंगाई के दौर में परिवार का भरण-पोषण करना असंभव हो गया है, जिसके कारण वे चरणबद्ध आंदोलन के लिए मजबूर हुई हैं।
स्कूलों में बदली गई वैकल्पिक व्यवस्था
रसोइयों और सहायिकाओं के सामूहिक रूप से काम बंद करने के कारण स्कूलों में भोजन की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। जिले के लगभग 2400 कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से प्रशासन के सामने बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। स्थिति को बिगड़ते देख शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने वैकल्पिक रास्ता निकाला है। अब हड़ताल से प्रभावित शालाओं में स्थानीय स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को भोजन तैयार करने की अस्थाई जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि बच्चों को भूखा न रहना पड़े।
लाखों बच्चों के निवाले पर संकट
धमतरी जिले में मिड-डे मील की व्यवस्था काफी व्यापक है, जहां 162 संकुलों के माध्यम से प्रतिदिन करीब एक लाख बच्चों के लिए ताजा और गर्म भोजन तैयार किया जाता है। हड़ताल लंबी खिंचने की वजह से कई स्कूलों में नियमित रसोई व्यवस्था बाधित हो गई है। हालांकि, स्व-सहायता समूहों ने जिम्मेदारी संभाल ली है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ स्कूलों में रसद और प्रबंधन को लेकर शुरुआती मुश्किलें भी आ रही हैं। आंदोलनकारी कर्मियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार की ओर से बजट में बढ़ोतरी का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी।
बजट और वेतन के गणित पर उठे सवाल
हड़ताल पर बैठी रसोइयों ने सरकार के सामने अपने वेतन का पूरा हिसाब रखा है। उनका तर्क है कि उन्हें मिलने वाले 2000 रुपये में से 600 रुपये केंद्र सरकार और 1400 रुपये राज्य सरकार देती है। यूनियन का दावा है कि स्कूल में घंटों मेहनत करने के बावजूद उन्हें मिलने वाली दिहाड़ी मजदूरी के न्यूनतम स्तर से भी कम है। उनकी प्रमुख मांग है कि आगामी बजट में उनके मानदेय में कम से कम 1000 रुपये की तत्काल वृद्धि की जाए और उन्हें विभाग का नियमित हिस्सा मानते हुए सामाजिक सुरक्षा के लाभ भी दिए जाएं।
प्रशासन की निगरानी और आगामी रणनीति
मध्यान्ह भोजन मजदूर एकता यूनियन के बैनर तले चल रहा यह आंदोलन 28 फरवरी तक जारी रहने की संभावना है। फिलहाल धमतरी प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का प्रयास है कि हड़ताल के बावजूद बच्चों की पढ़ाई और पोषण योजना पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मानदेय वृद्धि का निर्णय शासन स्तर का है, इसलिए वे फिलहाल केवल वैकल्पिक व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि जिले का कोई भी बच्चा भोजन से वंचित न रहे।



