
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश करते हुए छत्तीसगढ़ को एक बड़ी परियोजना की सौगात दी है। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़, ओडिशा और केरल में विशेष ‘माइनिंग कॉरिडोर’ विकसित करने का फैसला लिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खनिज संपन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और ट्रांसपोर्टेशन को आसान बनाना है। वर्तमान में राज्य में करीब 452 किलोमीटर लंबे तीन प्रमुख रेल कॉरिडोर पर काम चल रहा है, जिन्हें अब इस नई घोषणा से और विस्तार मिलने की उम्मीद है।
सीएम साय ने बताया ऐतिहासिक, बघेल ने कसा तंज
बजट को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे भारत के सुनहरे भविष्य का ‘ऐतिहासिक दस्तावेज’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि माइनिंग कॉरिडोर से राज्य की जीडीपी बढ़ेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। बघेल ने चुटकी लेते हुए कहा कि बजट में सिर्फ मछली सस्ती और शराब महंगी हुई है, बाकी आम जनता और छत्तीसगढ़ के लिए इसमें कुछ भी नहीं है।
उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का लगा आरोप
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने माइनिंग कॉरिडोर की घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बैज का आरोप है कि केंद्र सरकार अपने चहेते उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह गलियारा बना रही है। उन्होंने अंदेशा जताया कि अगले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के कीमती खनिज संसाधनों को निजी हाथों में बेचने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस का तर्क है कि राज्य में पहले से ही व्यापक खनन हो रहा है, ऐसे में नए कॉरिडोर से स्थानीय जनता के बजाय बाहरी पूंजीपतियों की तिजोरियां भरेंगी।
क्या होंगे माइनिंग कॉरिडोर के जमीनी फायदे
तकनीकी रूप से देखें तो माइनिंग कॉरिडोर के निर्माण से कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे खनिजों का परिवहन सीधे औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों तक आसान हो जाएगा। इससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और खनिज आधारित उद्योगों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से रेल और सड़क नेटवर्क मजबूत होगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को काम मिलेगा। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह कॉरिडोर राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है।
महंगाई और क्षेत्रीय उपेक्षा का उठा मुद्दा
विपक्ष ने बजट में छत्तीसगढ़ की उपेक्षा का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया है। दीपक बैज ने कहा कि जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां तो विशेष रियायतें दी गई हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ को केवल माइनिंग के नाम पर ठगा गया है। कांग्रेस ने महंगाई, गरीबी रेखा से बाहर आए लोगों के आंकड़ों और किसानों के मुद्दों पर भी वित्त मंत्री के दावों को गलत बताया है। कुल मिलाकर, बजट 2026 ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ विकास के दावे हैं तो दूसरी तरफ संसाधनों के दोहन की चिंता।



