
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के कामकाज को लेकर सदन का माहौल गरमाया रहा। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ महिला कोष की ऋण योजना को लेकर विभागीय मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से कई तीखे सवाल पूछे। चंद्राकर ने योजना के उद्देश्यों से लेकर बीते तीन सालों में महिलाओं को बांटे गए कर्ज और बजट के प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी मांगी। सवालों की इस झड़ी के बीच मंत्री ने आंकड़ों के जरिए जवाब देने की कोशिश की, जिससे विभाग की मौजूदा वित्तीय स्थिति और लक्ष्यों की हकीकत सामने आई।
तीन साल के आंकड़ों का हिसाब: लक्ष्य से पीछे छूट रहा है विभाग
अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर अब तक कितने महिला स्व-सहायता समूहों को ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था और वास्तव में कितनों को लाभ मिला। इसके जवाब में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि साल 2023-24 में 2500 समूहों का लक्ष्य था, जो अगले सालों में घटकर आधा रह गया। साल 2025-26 के लिए केवल 1250 समूहों को ही कर्ज देने का लक्ष्य रखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी 2026 तक 912 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 719 समूहों को लगभग 9.77 करोड़ रुपये का कर्ज बांटा गया है। चंद्राकर ने लक्ष्यों में लगातार हो रही इस कटौती पर भी ध्यान आकर्षित किया।
बजट की कमी या प्रशासनिक सुस्ती: 5 करोड़ के प्रावधान पर फंसा पेंच
चर्चा के दौरान बजट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए महिला कोष के अंतर्गत 5 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान तो किया गया है, लेकिन अब तक यह बजट विभाग को प्राप्त नहीं हुआ है। इससे पहले के सालों में भी बजट की राशि बहुत कम (9 लाख से 18 लाख के बीच) दिखाई गई थी, जिसे लेकर विपक्षी बेंचों से सवाल उठे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में महिला समूहों को 3 प्रतिशत की साधारण वार्षिक ब्याज दर पर 2 से 5 साल की अवधि के लिए कर्ज दिया जा रहा है।
कर्ज माफी पर स्पष्टीकरण: 2021 में माफ हुए थे 11 करोड़ रुपये
विधायक चंद्राकर ने यह भी जानना चाहा कि क्या इस योजना के तहत कभी कर्ज माफी की गई है। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि योजना के मूल नियमों में कर्ज माफ करने का कोई स्थाई प्रावधान नहीं है। हालांकि, पिछली सरकार की जनघोषणा के पालन में साल 2021 में एक विशेष कदम उठाया गया था। उस दौरान प्रदेश के 5845 महिला स्व-सहायता समूहों का कुल 11 करोड़ 6 लाख 81 हजार रुपये से अधिक का कर्ज माफ किया गया था। वर्तमान में ऐसी किसी नई कर्ज माफी की योजना से मंत्री ने इनकार किया है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर सवालिया निशान
अजय चंद्राकर के सवालों का मुख्य केंद्र यह था कि क्या यह योजना वास्तव में महिलाओं को आत्मनिर्भर बना पा रही है या सिर्फ कागजी लक्ष्यों तक सीमित है। उन्होंने पंजीयन की शर्तों और ऋण देने की जटिल प्रक्रिया पर भी स्पष्टता मांगी। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आश्वस्त किया कि विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है और पात्र समूहों को प्राथमिकता के आधार पर वित्तीय सहायता दी जा रही है। हालांकि, बजट की उपलब्धता और घटते लक्ष्यों को लेकर विपक्ष पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया और सदन में कुछ देर तक नोंकझोंक की स्थिति बनी रही।
Also Read: अफीम की खेती का मामले में नारकोटिक्स ब्यूरो की एंट्री, भूपेश बघेल भी पहुंचे भाजपा नेता के खेत



