
जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लॉक में सरकारी राशन की हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम कासा के उचित मूल्य की दुकान में ग्रामीणों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। यहां राशन कार्ड धारकों का आरोप है कि दुकान संचालक ने जनवरी और फरवरी महीने का चावल वितरण रिकॉर्ड में तो दर्ज कर दिया है, लेकिन असलियत में किसी भी ग्रामीण को अनाज नहीं मिला। संचालक ने चालाकी से मशीन पर लोगों के अंगूठे के निशान (फिंगर प्रिंट) ले लिए और उन्हें यह कहकर घर भेज दिया कि स्टॉक आने पर राशन दिया जाएगा।

चावल के साथ शक्कर और नमक भी गायब
उपभोक्ता भंडार की इस धांधली से गरीब परिवारों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल चावल ही नहीं, बल्कि कोटे में मिलने वाली शक्कर और नमक जैसी जरूरी चीजें भी नहीं दी जा रही हैं। जब भी कोई कार्ड धारक दुकान पर पहुंचता है, तो उसे सर्वर डाउन होने या स्टॉक खत्म होने का बहाना बनाकर टरका दिया जाता है। पिछले दो महीनों से राशन न मिलने की वजह से अब ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।

महिला स्वसहायता समूह पर गंभीर आरोप
कासा गांव की यह राशन दुकान एक महिला स्वसहायता समूह द्वारा संचालित की जा रही है। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर समूह के सदस्यों और सेल्समैन पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि समूह ने रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कर सरकारी अनाज को खुले बाजार में बेच दिया है या फिर स्टॉक की कालाबाजारी की जा रही है। यही वजह है कि ऑनलाइन डेटा में वितरण सफल दिख रहा है, जबकि गरीब जनता के चूल्हे ठंडे पड़े हैं।
ठगी का अहसास होने पर प्रशासन से गुहार
ग्रामीणों को ठगी का पता तब चला जब उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल पर चेक किया कि उनके कोटे का राशन वितरण दिखाया जा रहा है। खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे ग्रामीणों ने अब इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भरोसे के साथ उन्होंने अंगूठा लगाया था, संचालक ने उसी भरोसे का फायदा उठाकर उनके हक का निवाला छीन लिया। अब पीड़ित परिवार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं ताकि उन्हें बकाया राशन मिल सके।

जांच के घेरे में संचालक, कड़ी कार्रवाई की मांग
इस गड़बड़ी के उजागर होने के बाद अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि दुकान के स्टॉक रजिस्टर और ई-पॉस मशीन के डेटा का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाए। दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और दुकान का लाइसेंस निरस्त करने की भी मांग की जा रही है। अब देखना होगा कि खाद्य विभाग के अधिकारी इस गंभीर शिकायत पर कब तक कार्रवाई करते हैं और गरीबों को उनका हक कब वापस मिलता है।



