
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की 12 विधानसभा सीटों के सरकारी स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत इस क्षेत्र के तीन हजार से अधिक शिक्षकों को चुनावी कार्यों में लगाया गया है। शिक्षकों के स्कूल में उपस्थित न होने से बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और ताला
शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) बनाकर एसआईआर प्रक्रिया में लगाया गया है। इस बार अधिक संख्या में शिक्षकों को इस कार्य में लगाए जाने के कारण संकट गहरा गया है। बस्तर के कई स्कूलों में केवल एक या दो शिक्षक ही तैनात थे, और जब उन्हें बीएलओ ड्यूटी पर भेज दिया गया, तो कई स्कूलों में तो ताला तक डल गया। अन्य स्कूलों में केवल एक शिक्षक बचा है, जिसके लिए सभी कक्षाओं को चलाना मुश्किल हो रहा है।
बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी पर गहरा संकट
शिक्षकों की एसआईआर (SIR) ड्यूटी का सबसे बड़ा नकारात्मक असर बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों पर पड़ रहा है। स्कूलों में महत्वपूर्ण विषय पढ़ाने वाले शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी तैयारी पर सीधा असर हो रहा है। इसके अलावा, दिसंबर में होने वाली छह माही परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र भी पढ़ाई बाधित होने से परेशान हैं, जिससे उनके भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं।
बस्तर संभाग में SIR के लिए शिक्षक
बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में एसआईआर ड्यूटी में लगाए गए शिक्षकों की संख्या दर्शाती है कि यह संकट कितना व्यापक है। शिक्षा से जुड़े संगठनों ने तत्काल शिक्षकों को वापस स्कूलों में बुलाने की मांग की है।
इस चार्ट से समझें शिक्षकों की ड्यूटी
बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में शिक्षकों की ड्यूटी की संख्या दिखाती है कि यहशिक्षा संकट कितना गहरा है।
| जिला (District) | शिक्षकों की संख्या (Number of Teachers) |
| बस्तर (Bastar) | 730 |
| कांकेर (Kanker) | 638 |
| दंतेवाड़ा (Dantewada) | 430 |
| बीजापुर (Bijapur) | 246 |
| सुकमा (Sukma) | 330 |
| कोण्डागांव (Kondagaon) | 387 |
| नारायणपुर (Narayanpur) | 367 |
| कुल (Total) | 3128 |
शिक्षा संगठनों की प्रमुख मांगें
शिक्षा से जुड़े संगठनों ने सरकार के सामने चार मुख्य मांगें रखी हैं। उनकी प्राथमिक मांग है कि एसआईआर (SIR) जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए शिक्षकों के बजाय दूसरे विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। संगठनों ने जोर दिया है कि बच्चों के शैक्षणिक नुकसान को रोकने के लिए, पढ़ाई के सीजन में शिक्षकों को हटाकर पूरी शिक्षा व्यवस्था को रोक देना उचित नहीं है, और दिसंबर की परीक्षाओं को देखते हुए शिक्षकों को जल्द से जल्द स्कूलों में वापस भेजा जाना चाहिए।
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