VIDEO: अधिकारियों के नाम से नींबू काटेंगे सांसद भोजराज नाग, लापरवाह अफसरों को दी चेतावनी

धमतरी में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांकेर सांसद भोजराज नाग का बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि जो अधिकारी फोन नहीं उठाते, उनके नाम बताओ, उनके नाम से नींबू काटूंगा। यह बात सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद पत्रकार और कार्यकर्ता हंस पड़े। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

भगवान बिरसा मुंडा जयंती पर हुआ कार्यक्रम

धमतरी जिले के भाजपा कार्यालय में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रेस वार्ता रखी गई थी। इस दौरान सांसद भोजराज नाग ने बिरसा मुंडा के योगदान पर बात की और आदिवासी समाज के विकास को लेकर अपनी बात रखी। जब पत्रकारों ने उनसे जिले के अधिकारियों की कार्यशैली और उनकी लापरवाही को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि जो अधिकारी फोन नहीं उठाते, उनके नाम बताओ, मैं उनके नाम से नींबू काटूंगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मजाकिया अंदाज़

सांसद भोजराज नाग का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है। लोग उनके इस बयान को हल्के-फुल्के मजाक के तौर पर देख रहे हैं। भोजराज नाग बस्तर इलाके में अपने सरल स्वभाव और लोक शैली के कारण “बैगा सांसद” के नाम से जाने जाते हैं।

पहले भी बयानों को लेकर रहे हैं सुर्खियों में

यह पहली बार नहीं है जब भोजराज नाग अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हों। वे पहले भी कई सार्वजनिक मंचों पर अपने सहज अंदाज़ और देसी बोलचाल के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय रहे हैं। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह के बयान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संबंधों पर तंज नहीं हैं।

देखिये वीडियो-

चर्चा में आया ‘बैगा सांसद’ का अंदाज़

भोजराज नाग का यह मजाकिया बयान लोगों के बीच हंसी का कारण जरूर बना है, लेकिन इसके साथ ही यह भी दिखाता है कि वे प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कितने गंभीर हैं। चाहे यह बात नाराजगी में कही गई हो या मजाक में, “बैगा सांसद” का यह अंदाज़ अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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