
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अपनी रहस्यमयी गुफाओं और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए दुनिया भर में मशहूर है। अब इस खजाने में एक और अनमोल रत्न जुड़ गया है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में एक नई और बेहद दुर्लभ गुफा की पहचान हुई है, जिसे विशेषज्ञ ‘ग्रीन केव’ (हरी गुफा) कह रहे हैं। कोटुमसर गुफा परिसर के पास मिली यह गुफा अपनी बनावट के कारण वैज्ञानिकों और पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है। इस गुफा की सबसे बड़ी खासियत इसकी दीवारों और छत से लटकती चूना पत्थर की आकृतियां हैं, जिन पर सूक्ष्मजीवों की एक प्राकृतिक हरी परत जमी हुई है, जो इसे दूसरी गुफाओं से बिल्कुल अलग बनाती है।
भीतर का नजारा है जादुई: विशाल कक्ष और चमकदार पत्थरों की कलाकारी देख रह जाएंगे हैरान
ग्रीन गुफा के भीतर जाने का रास्ता घने जंगलों और बड़े-बड़े पत्थरों के बीच से होकर गुजरता है। जैसे ही कोई इसके मुहाने में कदम रखता है, उसे दीवारों पर जमी हरे रंग की मखमली परत दिखाई देती है। गुफा के भीतर एक बहुत बड़ा कमरा (हॉल) है, जहां कुदरत ने पत्थरों पर नक्काशी जैसी आकृतियां उकेरी हैं। यहां ऊपर से लटकते स्टैलेक्टाइट्स और नीचे से उभरते स्टैलेग्माइट्स के साथ ‘फ्लो-स्टोन’ यानी बहते पानी से जमी पत्थर की परतें बेहद चमकदार और विशाल हैं। अंधेरे में जब इन पर रोशनी पड़ती है, तो ये किसी महल की तरह जगमगा उठती हैं।
पर्यटन को लगेंगे पंख: वन विभाग तैयार कर रहा है बुनियादी ढांचा, जल्द शुरू होगा सफर
वन विभाग अब इस गुफा को पर्यटन के नक्शे पर लाने की तैयारी में जुटा है। चूंकि गुफा घने जंगल के बीच है, इसलिए वहां तक पहुंचने के लिए पैदल पथ (ट्रेल) और सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गुफा की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है ताकि इसके प्राकृतिक स्वरूप को कोई नुकसान न पहुंचे। विभाग वहां पर्यटकों की सुविधा के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। सुरक्षा और निगरानी के लिए विशेष गार्ड्स की तैनाती भी की गई है ताकि इस दुर्लभ प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
रोजगार और विकास की नई उम्मीद: वन मंत्री केदार कश्यप बोले- ‘बस्तर के पर्यटन को मिलेगा नया आयाम’
प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने इस खोज को बस्तर के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि ग्रीन गुफा के खुलने से कांगेर घाटी आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे न केवल बस्तर के पर्यटन को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए गाइड और अन्य माध्यमों से रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे। विभाग की योजना है कि सभी तैयारियां पूरी होने के बाद जल्द ही इस गुफा के दरवाजे आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे। बस्तर के आदिवासी अंचल में पर्यटन के इस विस्तार से क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
Also Read: वैश्विक स्तर पर पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर रहा है गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला



