
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफीम की अवैध खेती के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली हैं। शिवनाथ नदी के किनारे बसे गांव समोदा में भाजपा नेता के खेत में लहलहा रही अफीम की फसल ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद न केवल स्थानीय पुलिस, बल्कि नेशनल नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) की टीम भी जांच के मैदान में उतर चुकी है। शनिवार को एनसीबी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अफीम के पौधों की गिनती की और सबूत जुटाए। यह मामला अब एक बड़े नशे के नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है, जिसने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भूपेश बघेल का बड़ा हमला: “सत्ता के संरक्षण में फल-फूल रहा नशे का कारोबार”
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को घटनास्थल का दौरा किया और अफीम की खेती देखकर सरकार पर तीखा निशाना साधा। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग दस एकड़ में अफीम की खेती का खुलासा गांव के जागरूक बच्चों ने किया है, न कि प्रशासन ने। बघेल ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी एक रसूखदार भाजपा नेता है, जिसका सांसद और विधायकों के साथ सीधा संबंध है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदेश का भविष्य नशे की गर्त में जा रहा है और वे इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में जोर-शोर से उठाएंगे।
मक्के की आड़ में ‘काली कमाई’: ऐसे छिपाई गई प्रतिबंधित फसल
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से अफीम की खेती को अंजाम दिया था। नौ एकड़ से अधिक की जमीन पर मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे लगाए गए थे, ताकि दूर से देखने पर किसी को शक न हो। पुलिस ने पाया कि कई पौधों पर चीरे (Incisions) लगे हुए थे, जिसका सीधा मतलब है कि उनसे मादक पदार्थ निकालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। इतनी बड़ी मात्रा में और व्यवस्थित तरीके से की जा रही खेती को देखकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अमला दंग रह गया।
एनसीबी की विशेष जांच और मार्फिन कंपाउंड की पुष्टि
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) की टीम ने मौके पर ही केमिकल टेस्ट किया। शुरुआती जांच में पौधों में मार्फिन कंपाउंड (Morphine Compound) होने की पुष्टि हुई है, जो कि हेरोइन जैसे घातक ड्रग्स बनाने का मुख्य आधार है। एनसीबी की टीम अब आरोपी भाजपा नेता और उसके बेटे से पूछताछ करने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि यह जांच केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों के ड्रग सिंडिकेट से भी जुड़े हो सकते हैं।
राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल: बहन के नाम पर दर्ज है विवादित जमीन
पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच में भूमि के मालिकाना हक को लेकर अहम खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला कि जिस जमीन पर अफीम उगाई जा रही थी, वह राजस्व रिकॉर्ड में प्रीति बाला और मधुबाला ताम्रकार के नाम पर दर्ज है, जो मुख्य आरोपी विनायक ताम्रकार की बहनें बताई जा रही हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इन महिलाओं को इस अवैध गतिविधि की जानकारी थी या उनके नाम का उपयोग केवल कागजी खानापूर्ति और कानूनी बचाव के लिए किया जा रहा था।
पुलिस हिरासत में आरोपी और आगामी कानूनी कार्रवाई
फिलहाल, मुख्य आरोपी विनायक ताम्रकार पुलिस की गिरफ्त में है। पुलिस के आला अधिकारी लगातार केस की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा रहा है। कलेक्टर और तहसीलदार की मौजूदगी में राजस्व अमले ने पूरी भूमि का सीमांकन कर रिपोर्ट तैयार की है। विपक्ष इस मुद्दे को ‘नार्को-टेररिज्म’ से जोड़कर देख रहा है, जबकि भाजपा ने आरोपी के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और प्रभावशाली नामों के खुलासे की संभावना जताई जा रही है।



