Naxali Barse Deva Surrender: नक्सल संगठन की कमर टूटी: हिड़मा का खास और 50 लाख का इनामी नक्सली बारसे देवा उर्फ चैतू करेगा सरेंडर

जगदलपुर: बस्तर के जंगलों में आतंक का पर्याय बन चुके खूंखार नक्सली कमांडर बारसे देवा के सरेंडर की खबर ने सनसनी मचा दी है। सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष नक्सली नेता हिड़मा के बेहद करीबी और पीएलजीए (PLGA) बटालियन के कमांडर बारसे देवा ने अपने कुछ खास साथियों के साथ हैदराबाद में सरेंडर कर दिया है। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अभी इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अगले एक-दो दिनों में इसका आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है। बारसे देवा पर 50 लाख रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित है। हिड़मा के बाद उसे ही संगठन की सैन्य गतिविधियों की कमान सौंपी गई थी, ऐसे में उसका मुख्यधारा में लौटना नक्सलियों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प: अमित शाह के मिशन को मिली बड़ी मजबूती

केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए मार्च 2026 की समय सीमा तय की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सुरक्षा बल लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। जंगलों में या तो नक्सली मुठभेड़ में मारे जा रहे हैं या फिर चौतरफा दबाव के चलते आत्मसमर्पण कर रहे हैं। बारसे देवा जैसे प्रभावशाली चेहरे का सरेंडर होना इस बात का संकेत है कि अब नक्सली कैडर के भीतर भी बिखराव शुरू हो चुका है। यदि इस सरेंडर की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह बस्तर में शांति बहाली की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा और बचे हुए नक्सलियों का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा।

बटालियन नंबर 1 का था खौफ: सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में फैला था दहशत का जाल

नक्सलियों की ‘बटालियन नंबर 1’ को उनका सबसे आधुनिक और घातक दस्ता माना जाता है। बारसे देवा इसी टीम का नेतृत्व कर रहा था। इस बटालियन का सबसे ज्यादा प्रभाव सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के इलाकों में रहा है। इस टीम के पास एके-47, स्नाइपर गन और इंसास जैसे घातक हथियार मौजूद थे। ताड़मेटला, बुरकापाल और टेकलगुडेम जैसे बड़े हमलों के पीछे इसी बटालियन का हाथ रहा है, जिनमें देश ने अपने सैकड़ों बहादुर जवानों को खोया था। पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों ने इस बटालियन को चारों तरफ से घेरकर बैकफुट पर धकेल दिया था, जिसके चलते संगठन का आधार लगातार सिमटता जा रहा है।

नक्सल नेटवर्क में मची खलबली: हिड़मा के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ भी गिरा

बारसे देवा का जाना नक्सल संगठन के लिए केवल एक कमांडर का खोना नहीं, बल्कि उनकी पूरी सैन्य रणनीति का ध्वस्त होना है। हिड़मा के कमजोर पड़ने या एनकाउंटर की खबरों के बाद देवा ही वह शख्स था जो कैडर को एकजुट रखने और हमले प्लान करने में माहिर माना जाता था। उसके सरेंडर से नक्सलियों के खुफिया नेटवर्क और रसद आपूर्ति की कड़ियों का भी खुलासा होने की उम्मीद है। पुलिस को उम्मीद है कि देवा से पूछताछ में कई बड़े राज सामने आएंगे, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़े नक्सलियों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। नए साल के मौके पर सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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