
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन की कार्यप्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। नई व्यवस्था के तहत अब सदन में राज्यपाल के आगमन पर सबसे पहले ‘वंदे मातरम’ गीत बजाया जाएगा। इसके बाद ही राज्यपाल अपना अभिभाषण शुरू करेंगे। पुरानी परंपरा को बदलते हुए अब यह तय किया गया है कि अभिभाषण की समाप्ति पर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ का गायन होगा। विधानसभा सचिवालय ने इस नई व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है, जिसे सत्ता पक्ष और प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
केंद्र के नए दिशा-निर्देशों के तहत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान के नियम
इस बदलाव के पीछे केंद्र सरकार द्वारा ‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी किए गए नए दिशा-निर्देश मुख्य आधार हैं। नए नियमों के अनुसार, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और महत्वपूर्ण संवैधानिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रोटोकॉल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रगीत बजते समय सभी उपस्थित लोगों को उसी तरह खड़े होकर सम्मान देना होगा जैसा राष्ट्रगान के समय दिया जाता है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि सिनेमाघरों में फिल्मों के दौरान राष्ट्रगीत बजाने की अनिवार्यता लागू नहीं होगी। छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस नियम को लागू करने का उद्देश्य विधायी कार्यों की शुरुआत को देशप्रेम की भावना के साथ जोड़ना है।



