
रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षक बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एक बड़ी खबर है। राज्य सरकार अब शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने वर्तमान दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम की जगह चार वर्षीय एकीकृत (Integrated) बीएड कोर्स शुरू करने की रणनीति तैयार कर ली है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद छात्रों को स्नातक (Graduation) के बाद अलग से बीएड करने की जरूरत नहीं होगी। वे 12वीं पास करने के तुरंत बाद इस चार साल के कोर्स में दाखिला ले सकेंगे, जिससे उनके करियर के बहुमूल्य साल बचेंगे और वे शुरू से ही शिक्षण की बारीकियां सीख पाएंगे।
नई शिक्षा नीति (NEP) का असर: 2030 तक अनिवार्य होगी 4 साल की डिग्री, छत्तीसगढ़ भी रेस में शामिल
यह पूरा बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के आधार पर किया जा रहा है। केंद्र सरकार और यूजीसी ने लक्ष्य रखा है कि साल 2030 तक स्कूलों में पढ़ाने के लिए न्यूनतम योग्यता 4 वर्षीय एकीकृत बीएड डिग्री होगी। इसी विजन को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने भी कदम आगे बढ़ा दिए हैं। देश के कुछ अन्य राज्यों में यह प्रयोग पहले ही शुरू हो चुका है और अब छत्तीसगढ़ के चुनिंदा संस्थानों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने की योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को अधिक पेशेवर और आधुनिक तकनीकों में माहिर बनाना है।
कैसे लागू होगा नया सिस्टम: पहले चरण में सरकारी कॉलेजों से होगी शुरुआत, इंफ्रास्ट्रक्चर का हो रहा आकलन
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस बड़े बदलाव को अचानक थोपने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में राज्य के कुछ प्रतिष्ठित सरकारी और अनुदान प्राप्त (Aided) कॉलेजों को चुना जाएगा। विभाग अभी इन कॉलेजों में जरूरी संसाधन, शिक्षकों की उपलब्धता और लैब जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का जायजा ले रहा है। विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के साथ मिलकर नया सिलेबस तैयार किया जा रहा है, जो पुराने ढर्रे से बिल्कुल अलग और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से होगा।
समय और पैसे की होगी बचत, प्रोफेशनल ट्रेनिंग पर रहेगा ज्यादा जोर
चार वर्षीय बीएड कोर्स छात्रों के लिए एक ‘स्मार्ट चॉइस’ साबित होगा। अभी तक छात्र पहले तीन साल कॉलेज की पढ़ाई करते हैं और फिर दो साल बीएड में लगाते हैं, जिससे कुल पांच साल खर्च होते हैं। नए सिस्टम में यही काम चार साल में पूरा हो जाएगा। इसके अलावा, छात्रों को लंबे समय तक स्कूलों में इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा। वे केवल किताबों से नहीं, बल्कि वास्तविक क्लासरूम में बच्चों को पढ़ाकर अपना कौशल सुधार सकेंगे। इससे जब वे नौकरी के लिए निकलेंगे, तो उनके पास किसी भी सामान्य ग्रेजुएट के मुकाबले ज्यादा अनुभव होगा।
सुधरेगी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता: केवल डिग्री नहीं, स्किल्ड टीचर तैयार करने पर फोकस
शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि वर्तमान दो वर्षीय बीएड अक्सर केवल एक डिग्री हासिल करने तक सीमित रह जाता है। इसमें व्यावहारिक अनुभव की कमी महसूस की जाती रही है। चार वर्षीय पाठ्यक्रम में छात्रों को शुरू से ही शिक्षा मनोविज्ञान, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और स्कूल प्रबंधन से जोड़ा जाएगा। इससे भविष्य में स्कूलों को ऐसे शिक्षक मिलेंगे जो न केवल अपने विषय के ज्ञाता होंगे, बल्कि बच्चों की मानसिक और सामाजिक जरूरतों को समझने में भी सक्षम होंगे। यह बदलाव प्रदेश की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की तस्वीर बदलने वाला साबित हो सकता है।
इसी सत्र से शुरू हो सकता है पाठ्यक्रम, सचिव ने दी जानकारी
उच्च शिक्षा सचिव एस. भारतीदासन ने संकेत दिए हैं कि विभाग इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के कुछ संस्थानों में दाखिले शुरू हो सकते हैं। इस नए एकीकृत कोर्स का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि इससे विभिन्न विषयों (जैसे विज्ञान, गणित, भाषा) के विशेषज्ञों की कमी दूर होगी। जब युवा अपनी रुचि के विषय के साथ टीचिंग का कोर्स करेंगे, तो वे भविष्य में बेहतर सब्जेक्ट एक्सपर्ट बनकर उभरेंगे। सरकार का मानना है कि यह निवेश राज्य के भविष्य को संवारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
Also Read: डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन 11वें दिन भी जारी, 100 से ज्यादा की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती



