
CBSE Schools Subsidy: छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत “छत्तीसगढ़ निजी विद्यालय प्रोत्साहन नियम, 2025” तैयार किया गया है। इस नीति के अंतर्गत अब ग्रामीण और पिछड़े शहरी क्षेत्रों में भी सीबीएसई स्कूल खोले जा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि गांवों में भी बच्चों को शहर जैसी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।
स्कूलों में होंगी ये जरूरी सुविधाएं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा से जुड़ी सभी आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी, जैसे—
- छात्रावास
- पुस्तकालय
- स्मार्ट क्लास
- विज्ञान प्रयोगशाला
- खेलकूद की सुविधाएं
इन व्यवस्थाओं से ग्रामीण छात्रों को शहरों जैसी आधुनिक सुविधाएं गांवों में ही मिलेंगी।
निवेशकों को मिलेगा सरकारी प्रोत्साहन
यदि कोई निवेशक नया सीबीएसई स्कूल खोलना चाहता है, तो उसे “उद्यम आकांक्षा प्रमाण पत्र” और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के साथ आवेदन देना होगा।
परियोजना रिपोर्ट में निम्न जानकारी देना आवश्यक होगा—
- निवेश की लागत
- स्थल चयन
- भवन का नक्शा (आर्किटेक्चरल प्लान)
- संभावित रोजगार के आंकड़े
निवेश की गणना लोक निर्माण विभाग की दर या ₹2,000 प्रति वर्गफुट (जो न्यूनतम हो) के हिसाब से की जाएगी।
किन क्षेत्रों में मिलेगी सब्सिडी
सरकार ने इन स्कूलों को औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत शामिल किया है। इससे निवेशकों को निम्न लाभ मिलेंगे
- ब्याज पर सब्सिडी
- पूंजी लागत सब्सिडी
- स्टांप ड्यूटी में छूट
- बिजली शुल्क में रियायत
मान्य स्थायी पूंजी निवेश में निम्न मदें शामिल होंगी
भवन निर्माण, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला, खेल अधोसंरचना, छात्रावास और मेस।
हालांकि, भूमि, कार्यशील पूंजी और प्रारंभिक व्यय (Pre-Operative Cost) को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
राज्य स्तरीय समिति करेगी निगरानी
सभी आवेदनों की जांच और स्वीकृति के लिए राज्य स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता आयुक्त/संचालक उद्योग करेंगे।
समिति में कुल 8 सदस्य होंगे, जिनमें शामिल हैं
- संबंधित जिले के कलेक्टर
- सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक
- लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता
- संचालक लोक शिक्षण (अनिवार्य सदस्य)
यह समिति सभी प्रस्तावों की समीक्षा कर अंतिम स्वीकृति देगी।
गांवों को होंगे ये बड़े फायदे
इस नीति से ग्रामीण और छोटे कस्बों को कई लाभ होंगे—
- अब बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे खर्च और परेशानी दोनों कम होंगी।
- नए स्कूल खुलने से शिक्षक, स्टाफ और अन्य पदों पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- आधुनिक स्मार्ट क्लास, लैब और खेल सुविधाओं से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- RTE (राइट टू एजुकेशन) के तहत 25% सीटें गरीब और वंचित बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी।
- स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने से गांवों में सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य है —
“हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना, चाहे वह गांव में हो या शहर में।” यह योजना ग्रामीण शिक्षा में नई क्रांति लाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।
अन्य आदेश
छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने यह भी आदेश जारी किया है कि ड्यूटी टाइम और सार्वजनिक स्थानों पर कोई भी कर्मचारी शराब का सेवन नहीं करेगा। सभी कर्मचारियों को इस संबंध में घोषणा पत्र भरकर देना होगा।
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