
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ (VSK) ऐप के जरिए ऑनलाइन हाजिरी शुरू करने का फैसला गले की फांस बनता जा रहा है। राज्य सरकार ने फरमान जारी किया है कि अब शिक्षकों का वेतन इसी ऐप पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर बनेगा। लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश के करीब 1.77 लाख शिक्षकों में से 71 प्रतिशत ने ऐप डाउनलोड तो कर लिया है, पर नियमित हाजिरी लगाने वालों की संख्या महज 24 प्रतिशत ही है। इस व्यवस्था को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठन अब आमने-सामने आ गए हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।
मुंगेली और बिलासपुर में हालात सबसे ज्यादा खराब
आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के कई जिलों में ऑनलाइन अटेंडेंस की स्थिति बेहद निराशाजनक है। मुंगेली जिले में तो रिकॉर्ड तोड़ गिरावट देखी गई है, जहां केवल 2 प्रतिशत शिक्षक ही ऑनलाइन हाजिरी लगा रहे हैं। न्यायधानी बिलासपुर का हाल भी कुछ खास नहीं है, वहां करीब आधे शिक्षकों ने ऐप पर रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया है और जो पंजीकृत हैं, उनमें से केवल 6 प्रतिशत ही हाजिरी दर्ज कर रहे हैं। सक्ती, गरियाबंद, दुर्ग और कोरबा जैसे एक दर्जन से अधिक जिलों में यह आंकड़ा 10 प्रतिशत के नीचे सिमट कर रह गया है।
| जिले का नाम | ऑनलाइन हाजिरी का प्रतिशत | स्थिति |
| मुंगेली | 2% | अत्यंत खराब |
| बिलासपुर | 6% | निराशाजनक |
| दुर्ग/कोरबा | 10% से कम | चिंताजनक |
| छत्तीसगढ़ (औसत) | 24% | सुस्त |
वेतन रोकने के फरमान से शिक्षकों में खलबली
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि तीन दिनों के भीतर शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन और हाजिरी सुनिश्चित की जाए। शासन ने साफ कर दिया है कि 15 जनवरी की समयसीमा खत्म होने के बाद अब बिना ऑनलाइन अटेंडेंस के सैलरी नहीं बनेगी। यानी अगर शिक्षक ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे, तो उन्हें उस दिन का वेतन नहीं दिया जाएगा। सरकार की इस सख्ती से स्कूलों में खलबली मची हुई है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों और विरोध के चलते शिक्षक अभी भी पीछे हट रहे हैं।
निजता और संसाधनों को लेकर शिक्षकों का विरोध
शिक्षक संगठनों ने इस डिजिटल सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि विभाग शिक्षकों के निजी मोबाइल फोन का इस्तेमाल हाजिरी के लिए करने का दबाव बना रहा है, जो उनकी प्राइवेसी का हनन है। शिक्षकों की मांग है कि अगर सरकार बायोमेट्रिक या ऑनलाइन अटेंडेंस चाहती है, तो स्कूलों में इसके लिए मशीनें और हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा, ऐप के जरिए डेटा लीक होने के डर और खराब नेटवर्क वाले इलाकों में अटेंडेंस न लग पाने की समस्या को लेकर भी गतिरोध बना हुआ है।
फेल होता दिख रहा है ‘अंजोर विजन 2047’ का लक्ष्य
सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ और हालिया विभागीय समीक्षा बैठकों में यह तय किया था कि सभी शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति डिजिटल होगी। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना था, लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों के विरोध ने इस मिशन को संकट में डाल दिया है। फिलहाल डेडलाइन खत्म हो चुकी है और अब देखना होगा कि शासन सैलरी रोकने के अपने फैसले पर अडिग रहता है या शिक्षकों की मांगों के आगे झुकते हुए सिस्टम में कुछ बदलाव करता है।



