CG Legislative Assembly VIDEO: सदन में कांग्रेस विधायक ने लगाया आरोप कहा- “चहेतों का कब्जा नहीं हटा पा रही सरकार”, विपक्ष ने किया सदन से वॉकआउट

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन की शुरुआत भारी हंगामे के साथ हुई। प्रश्नकाल के पहले ही सवाल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। मुद्दा था डोंगरगढ़ में जिला सहकारी बैंक के नए भवन का निर्माण, जो टेंडर होने के बावजूद अब तक शुरू नहीं हो पाया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपने चहेतों के अवैध कब्जे को बचाने के लिए सार्वजनिक संपत्ति के निर्माण में रोड़ा अटका रही है। सहकारिता मंत्री के जवाब से नाराज होकर पूरे विपक्ष ने सदन की कार्यवाही से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।

स्वीकृत होने के बाद भी क्यों नहीं बना भवन? हर्षिता बघेल ने उठाए सवाल

कांग्रेस विधायक हर्षिता बघेल ने डोंगरगढ़ जिला सहकारी बैंक के भवन निर्माण में हो रही देरी का मामला सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि बैंक के नए भवन के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है और टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। इसके बावजूद धरातल पर ईंट तक नहीं रखी गई है। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित जमीन पर रसूखदारों ने अतिक्रमण कर रखा है, जिसे हटाने में जिला प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किसके दबाव में सरकारी जमीन को खाली नहीं कराया जा रहा है?

किराए के कमरे में चल रहा बैंक: किसानों और ग्राहकों की बढ़ी मुश्किलें

विधायक हर्षिता बघेल ने सदन का ध्यान बैंक की बदहाली की ओर खींचते हुए कहा कि वर्तमान में जिला सहकारी बैंक एक छोटे से किराए के भवन में संचालित हो रहा है। डोंगरगढ़ क्षेत्र के हजारों किसान और ग्राहक इसी बैंक पर निर्भर हैं, लेकिन पर्याप्त जगह न होने के कारण वहां हर दिन भारी भीड़ और अव्यवस्था का माहौल रहता है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब सारी कागजी औपचारिकताएं पूरी हैं, तो किसानों की सुविधा के लिए खुद का भवन बनाने में सरकार को क्या परहेज है?

मंत्री केदार कश्यप का जवाब: “प्रस्तावित जगह अब उपयुक्त नहीं”

सवालों का जवाब देते हुए सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने एक नया मोड़ ला दिया। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर पहले भवन निर्माण प्रस्तावित किया गया था, वह तकनीकी रूप से अब उपयुक्त नहीं पाया गया है। मंत्री ने दलील दी कि बैंक की जरूरतों को देखते हुए स्थान परिवर्तन पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि इस संबंध में जिला कलेक्टर से चर्चा कर जल्द ही किसी नई और बेहतर जमीन का चयन किया जाएगा ताकि निर्माण कार्य सुनिश्चित हो सके। हालांकि, मंत्री के इस जवाब ने विवाद को और हवा दे दी।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने घेरा: “बाकी जगह बुलडोजर, यहाँ चुप्पी क्यों?”

मंत्री के जवाब पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित जमीन पर पार्किंग से लेकर भवन निर्माण तक के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है। बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि राज्य में अन्य जगहों पर अवैध निर्माण गिराने के लिए सरकार तुरंत बुलडोजर भेज देती है, लेकिन यहाँ किसी ‘खास’ व्यक्ति के अतिक्रमण को बचाने के लिए जमीन को ही अनुपयुक्त बताया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दे रहा है और आम जनता के हितों की अनदेखी कर रहा है।

चहेतों को बचाने का आरोप: सदन में गूंजे भ्रष्टाचार के नारे

विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित भूमि पर किसी भाजपा समर्थित रसूखदार का कब्जा है, जिसे हटाने की हिम्मत स्थानीय प्रशासन नहीं जुटा पा रहा है। चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों ने “चहेतों को संरक्षण देना बंद करो” के नारे लगाए। विपक्ष ने कहा कि सरकारी खजाने से टेंडर होने के बाद स्थान बदलना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का संकेत है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के सदस्यों और विपक्ष के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक चलती रही, जिससे सदन का माहौल गरमा गया।

जवाब से असंतुष्ट विपक्ष का वॉकआउट: बाधित हुई कार्यवाही

जब सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने अतिक्रमण हटाने की कोई स्पष्ट समय-सीमा या कार्रवाई का ठोस आश्वासन नहीं दिया, तो विपक्षी सदस्य भड़क गए। कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर सच्चाई छिपाने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट करने का फैसला किया। विपक्ष के इस कड़े रुख के कारण प्रश्नकाल के दौरान काफी देर तक हंगामा होता रहा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक डोंगरगढ़ के किसानों को उनके हक का बैंक भवन नहीं मिल जाता, वे इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक जारी रखेंगे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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