
Nakati Village Raipur: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नवा रायपुर क्षेत्र के पास स्थित नकटी गांव इन दिनों चर्चा में है। वजह है – गांव की ज़मीन पर सरकार द्वारा प्रस्तावित विधायक कॉलोनी का निर्माण। इस कॉलोनी के लिए ज़मीन अधिग्रहण की तैयारी चल रही है, लेकिन गांव के लोग इस फैसले के सख्त खिलाफ हैं। उनका कहना है कि यह ज़मीन उनकी पुश्तैनी है, जहां कई पीढ़ियों से वे रह रहे हैं और अब इसे किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

लगातार जारी है विरोध, ग्रामीणों के साथ विपक्ष भी मैदान में
सम्मानपुर नकटी गांव के लोग बीते दो दिनों से अपनी ज़मीन पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इस विरोध में अब राजनीतिक रंग भी चढ़ गया है। प्रदर्शन में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद छाया वर्मा और धरसींवा की पूर्व विधायक अनीता शर्मा भी शामिल हुईं। दोनों ने सरकार के फैसले को गलत बताया और साफ कहा कि गरीबों को उजाड़कर विधायक कॉलोनी बनाना नाइंसाफी है।

छाया वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि अगर विधायक कॉलोनी बनानी है तो उसे नए विधानसभा परिसर के आसपास बनाया जाए। गांवों को उजाड़कर विकास नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ज़बरदस्ती नोटिस भेजकर गांव वालों की ज़मीन पर कब्जा करना चाहती है। यहां तक कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों को भी तोड़ा जा रहा है।
“हमारी पुश्तैनी ज़मीन है, इसे नहीं देंगे” – ग्रामीण महिलाओं की दो टूक
गांव की महिलाओं ने भी इस विरोध में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनका कहना है कि यह ज़मीन उनके पुरखों की है, जिसे उन्होंने चारागाह और खेती के लिए संरक्षित किया था। आज यहां 85 परिवार रहते हैं और कई घर तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए हैं।
ग्रामीण महिलाओं ने सरकार को दो टूक जवाब दिया –
“हम अपनी ज़मीन किसी विधायक कॉलोनी के लिए नहीं देंगे। यह ज़मीन सिर्फ नकटी गांव वालों की है।”

सरकार की योजना क्या है?
छत्तीसगढ़ सरकार ने रायपुर के बाहरी इलाके में एक नई विधायक कॉलोनी बसाने की योजना बनाई है। इसके लिए नकटी और आस-पास के गांवों की खेती योग्य ज़मीन अधिग्रहण की जा रही है। सरकार का तर्क है कि नए जनप्रतिनिधियों के लिए सुविधाजनक आवास की जरूरत है।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आजीविका इसी ज़मीन से जुड़ी है, और उन्हें उजाड़ना विकास नहीं बल्कि अन्याय है।
विधायक अनुज शर्मा का बयान – “यह फैसला सरकार का है”
विधायक अनुज शर्मा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि-
यह फैसला सरकार का है, लेकिन किसी भी जरूरतमंद के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह गांव जाकर ग्रामीणों से मिल चुके हैं और अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसी का जबरन घर न तोड़ा जाए।
उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी छेरीखेड़ी गांव में कांग्रेस सरकार ने एक प्रस्तावित अधिग्रहण वापस ले लिया था, तो ऐसी संभावना यहां भी हो सकती है।

ग्रामीणों की तीन मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- उनकी ज़मीन का अधिग्रहण रद्द किया जाए।
- अगर ज़मीन लेनी ही है, तो उचित मुआवज़ा और पुनर्वास की व्यवस्था हो।
- विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की सहमति और भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

विकास ज़रूरी है, लेकिन इंसाफ के साथ
नकटी गांव की यह घटना साफ बताती है कि विकास और आम लोगों के अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है। अगर सरकार को वाकई जनहित में कोई योजना लागू करनी है, तो उसे ग्रामीणों की भावनाओं और ज़मीन से जुड़े रिश्ते को समझना होगा। नहीं तो ऐसे विरोध भविष्य में और गहरा सकते हैं।



