
छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए इस बार होली का उत्साह दोगुना होने वाला है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘कृषक उन्नति योजना‘ के तहत धान की अंतर राशि (आदान सहायता) जारी करने का बड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों किसानों के बैंक खातों में त्यौहार से पहले खुशहाली पहुंचेगी। अकेले कबीरधाम जिले की बात करें तो यहाँ के 1 लाख 17 हजार 344 किसानों के लिए 461.82 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है। सरकार का यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और किसानों को कर्ज मुक्त बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री 28 फरवरी को करेंगे राशि का डिजिटल ट्रांसफर
धान की इस सहायता राशि का इंतजार कर रहे किसानों के लिए 28 फरवरी का दिन बेहद खास होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस दिन राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होकर एक क्लिक के जरिए करोड़ों रुपये की राशि का अंतरण करेंगे। कवर्धा के कृषि विज्ञान केंद्र में मुख्य समारोह आयोजित होगा, जहाँ से मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के किसानों से रूबरू होंगे। इसके साथ ही पंडरिया, सहसपुर लोहारा और बोड़ला जैसे विकासखंडों में भी स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इस उत्सव से जोड़ा जा सके।
अगली फसल की तैयारी और घरेलू जरूरतों में मिलेगी मदद
सरकार द्वारा जारी की जा रही यह राशि न केवल त्यौहारों की चमक बढ़ाएगी, बल्कि खेती-किसानी के भविष्य को भी सुरक्षित करेगी। त्यौहारी सीजन में अक्सर किसानों को नकदी की किल्लत का सामना करना पड़ता है, ऐसे में यह पैसा उनकी घरेलू जरूरतों के लिए संजीवनी साबित होगा। इसके साथ ही किसान आने वाले खरीफ सीजन के लिए समय रहते उन्नत बीज, खाद और कीटनाशकों की बुकिंग कर सकेंगे। समय पर पैसा मिलने से किसानों को साहूकारों या कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलेगी, जो मुख्यमंत्री के ‘समृद्ध किसान’ के संकल्प को पूरा करता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगी कृषक उन्नति योजना
कृषक उन्नति योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र को एक मजबूत आधार प्रदान करना है। जब किसानों की क्रय शक्ति बढ़ती है, तो उसका सीधा असर स्थानीय बाजारों और व्यापार पर पड़ता है। होली से पहले इतनी बड़ी राशि का बाजार में आना ग्रामीण व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। शासन की यह पहल स्पष्ट करती है कि प्रदेश की विकास नीतियों के केंद्र में अन्नदाता की खुशहाली सबसे ऊपर है। यह योजना न केवल वर्तमान वित्तीय जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि आधुनिक कृषि के लिए किसानों को प्रोत्साहित भी कर रही है।



