
छत्तीसगढ़ सरकार इस साल खरीफ सीजन में धान खरीदी का अपना निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी है। प्रशासन ने 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अभियान खत्म होने तक केवल 139.85 लाख मीट्रिक टन की ही आवक हुई। यह आंकड़ा पिछले साल हुई 149 लाख टन की खरीदी से लगभग 9 लाख टन कम है। 15 नवंबर से शुरू हुई इस प्रक्रिया में 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा था, लेकिन समय सीमा समाप्त होने तक बड़ी संख्या में किसान केंद्रों के बाहर ही रह गए।
टोकन व्यवस्था और छुट्टियों ने बढ़ाई मुश्किल
धान खरीदी के लक्ष्य से पिछड़ने की एक बड़ी वजह टोकन व्यवस्था में आई दिक्कतें मानी जा रही हैं। 15 जनवरी के बाद से ऑनलाइन और ऑफलाइन टोकन का काम बंद कर दिया गया था, जिससे लगभग 2.85 लाख किसान अपनी उपज बेचने के लिए पर्ची नहीं कटवा सके। इनमें से करीब 1.90 लाख छोटे किसान थे जो आखिरी दिनों तक इंतजार करते रह गए। इसके अलावा शनिवार और रविवार को केंद्रों की छुट्टी होने की वजह से भी काम प्रभावित हुआ, जिसका सीधा असर कुल खरीदी के आंकड़ों पर पड़ा।
धान की किस्म और प्रमुख केंद्रों के आंकड़े
इस साल खरीदी गई कुल फसल में सबसे बड़ा हिस्सा मोटे धान का रहा, जबकि सरना और पतले धान की आवक भी अच्छी दर्ज की गई। राजधानी रायपुर और बिलासपुर जैसे संभागों में खरीदी का जोर रहा, लेकिन बस्तर और सरगुजा में आंकड़े उम्मीद से कम रहे। सरकार अब इन आंकड़ों का विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन जिलों में किसान केंद्रों तक क्यों नहीं पहुंच पाए।
| विवरण | खरीदी का आंकड़ा (मीट्रिक टन) |
| मोटा धान | 76,96,221 |
| सरना धान | 53,98,312 |
| पतला धान | 8,90,853 |
| कुल आवक | 1,39,85,387 |
जशपुर में हाईवे पर कतारें और अकलतरा में हताशा
धान खरीदी के अंतिम दिन प्रदेश के कई हिस्सों से अफरा-तफरी की खबरें आईं। जशपुर जिले में किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ नेशनल हाईवे पर रात भर तौलाई का इंतजार करते नजर आए। वहीं, जांजगीर-चांपा के अकलतरा में व्यवस्था से नाराज एक किसान ने जहर पीकर जान देने की कोशिश की, जिसे समय रहते अस्पताल पहुंचाकर बचाया गया। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक खामियों की वजह से उनकी मेहनत की फसल खेतों और गोदामों में ही पड़ी रह गई है।
किसान संगठनों ने दी प्रदर्शन की चेतावनी
अधूरी खरीदी और टोकन न मिल पाने से नाराज किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठनों का आरोप है कि हजारों किसानों के पास अब भी स्टॉक बचा है और उन्हें अपनी फसल औने-पौने दाम पर बिचौलियों को बेचनी पड़ेगी। उन्होंने मांग की है कि धान खरीदी की तारीख और टोकन की सीमा बढ़ाई जाए, अन्यथा वे बचे हुए धान को लेकर कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करेंगे। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में तूल पकड़ सकता है।
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