कवर्धा के बाद अब महासमुंद में मची खलबली: 5.71 करोड़ का धान गायब, प्रभारी बोले- चूहे, चिड़िया और दीमक खा गए सारा माल

महासमुंद: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में हुए बड़े धान घोटाले की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब महासमुंद जिले से भी भ्रष्टाचार की वैसी ही गंध आने लगी है। जिले के बागबाहरा स्थित धान संग्रहण केंद्र में 18 हजार 433 क्विंटल धान कम पाया गया है, जिसकी सरकारी कीमत करीब 5 करोड़ 71 लाख रुपये आंकी गई है। जब इस भारी कमी को लेकर सवाल पूछे गए, तो केंद्र प्रभारी दिपेश कुमार पांडेय ने एक ऐसा जवाब दिया जिसे सुनकर हर कोई दंग है। प्रभारी का दावा है कि धान की यह कमी प्राकृतिक ‘सूखत’ (नमी कम होने) के अलावा चूहों, चिड़ियों और दीमकों द्वारा धान खा जाने के कारण हुई है। हालांकि, इतनी बड़ी मात्रा में अनाज का गायब होना सीधे तौर पर करोड़ों की हेराफेरी की ओर इशारा कर रहा है।

चूहों की भूख या भ्रष्टाचार की साजिश: गणित के हिसाब से हर घंटे 2 क्विंटल से ज्यादा अनाज चट कर गए जीव, प्रभारी की दलील ने सबको चौंकाया

संग्रहण केंद्र प्रभारी की दलीलें गले नहीं उतर रही हैं। उनके मुताबिक, साल 2024-25 में करीब 12.63 लाख बोरा धान आया था। आवक के समय धान में 17 प्रतिशत नमी थी, जो अब घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। लेकिन अगर प्रभारी के दावों को सच माना जाए, तो इसका मतलब है कि पिछले 10 महीनों से संग्रहण केंद्र में मौजूद चूहे, चिड़िया और कीड़े मिलकर हर घंटे लगभग 256 किलो धान खा रहे थे। यह आंकड़े बताते हैं कि सिस्टम में बैठे लोग अपनी लापरवाही और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए बेजुबान जानवरों का सहारा ले रहे हैं। हकीकत यह है कि प्रशासन धान के रखरखाव और सुरक्षा के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है, फिर भी इतना अनाज गायब हो गया।

नियमों की उड़ी धज्जियां: 2% से ज्यादा कमी पर होना था सस्पेंशन और FIR, 3.65% की लूट के बाद भी केवल ‘नोटिस’ तक सिमटी कार्रवाई

खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव ने 12 सितंबर 2025 को कड़े निर्देश जारी किए थे। आदेश के अनुसार, अगर धान के स्टॉक में 1 से 2 प्रतिशत की कमी आती है, तो विभागीय जांच होनी चाहिए। वहीं, 2 प्रतिशत से ज्यादा की कमी होने पर संबंधित प्रभारी को तत्काल सस्पेंड कर उसके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। बागबाहरा केंद्र में धान की कमी का आंकड़ा 3.65 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो कि तय सीमा से कहीं ज्यादा है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी की गिरफ्तारी हुई है और न ही किसी को निलंबित किया गया। विभाग केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर औपचारिकता पूरी करने में जुटा है।

कलेक्टर बोले- मुझे जानकारी नहीं: मार्कफेड के डीएमओ से रिपोर्ट मांगने की कही बात, करोड़ों के घोटाले पर प्रशासन की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

करोड़ों रुपये के इस घोटाले पर जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। जब इस पूरे मामले को लेकर महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह से बात की गई, तो उन्होंने चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि उन्हें इस मामले की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। कलेक्टर ने कहा कि वे मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारी (DMO) से इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगेंगे और यदि कोई गंभीर गड़बड़ी पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, डीएमओ ने स्वीकार किया है कि 3.65 प्रतिशत का शॉर्टेज गंभीर मामला है और सचिव के पत्र के आधार पर ही अगली विभागीय कार्यवाही तय की जाएगी।

क्या मिलर्स और बिचौलियों के पास पहुंचा सरकारी धान? जांच के दायरे में कई रसूखदार, अब रिपोर्ट के आधार पर होगी अगली कार्रवाई

महासमुंद के इस प्रकरण ने राज्य की धान संग्रहण और वितरण प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल चूहों या सूखत का मामला नहीं है, बल्कि यह धान चोरी कर मिलर्स या खुले बाजार में बेचने का एक बड़ा सिंडिकेट हो सकता है। मार्कफेड के माध्यम से करोड़ों रुपये रखरखाव पर खर्च करने के बाद भी सरकारी संपत्ति का इस तरह बर्बाद होना जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने लाती है और क्या सरकार इन ‘चूहे-चिड़िया’ वाले दावों के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब कर पाती है या नहीं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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