
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने साल 2026 के पद्मश्री पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। इस बार छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि राज्य की तीन विभूतियों को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। ये तीनों ही नाम बस्तर जैसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित अंचल में दशकों से निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं। पुरस्कार पाने वालों में समाजसेविका बुधरी ताती और चिकित्सा के क्षेत्र में समर्पित डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले व उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले शामिल हैं।
‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताती का सेवा सफर
दंतेवाड़ा के हीरानार गांव की रहने वाली बुधरी ताती को लोग सम्मान से ‘बड़ी दीदी’ कहते हैं। साल 1984 से वे लगातार वनांचल क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, नशामुक्ति और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में झोंक दिया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सलवाद के साये के बावजूद उन्होंने 500 से अधिक महिलाओं को सिलाई और अन्य कार्यों के जरिए स्वावलंबी बनाया है। उनकी सादगी और समर्पण ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।

37 सालों से अबूझमाड़ में मुफ्त इलाज
डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को चिकित्सा के क्षेत्र में संयुक्त रूप से पद्मश्री दिया जाएगा। यह दंपत्ति पिछले 37 वर्षों से बस्तर और अबूझमाड़ के उन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है जहां आज भी सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क पहुंचना सपना है। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रामचंद्र और उनकी पत्नी सुनीता ने कुपोषण के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है। उनका समर्पण इतना गहरा है कि वे खुद पैदल चलकर सुदूर गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं।
‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ से बदली हजारों की जिंदगी
गोडबोले दंपत्ति ने ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ संस्था के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाया है। दुर्गम रास्तों पर अपनी जान जोखिम में डालकर उन्होंने आदिवासियों के बीच आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा का तालमेल बैठाया। उनकी इसी निस्वार्थ सेवा के लिए उन्हें पहले स्वामी विवेकानंद अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। आज उनके द्वारा शुरू की गई स्वास्थ्य जागरूकता की लहर ने हजारों आदिवासियों को गंभीर बीमारियों और कुपोषण के चंगुल से बाहर निकाला है।

छत्तीसगढ़ के गौरव की नई पहचान
इन पुरस्कारों के जरिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के जमीनी नायकों के संघर्ष को वैश्विक पहचान दी है। बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में बिना किसी प्रचार की चाह के काम करने वाले इन लोगों का चयन राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। इन नामों की घोषणा के बाद से ही पूरे प्रदेश और विशेषकर दंतेवाड़ा जिले में खुशी की लहर है। यह सम्मान उन सभी कार्यकर्ताओं की जीत है जो अभावों के बीच समाज सेवा का संकल्प लेकर चल रहे हैं।



