
कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मान्तरण के बढ़ते मामलों के विरोध में ग्रामीणों ने एक और बड़ा कदम उठाया है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम टेकाठोडा (कच्चे) के ग्रामीणों ने गाँव में ईसाई धर्म प्रचारकों, जैसे पास्टर, पादरी और धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
इसके साथ ही, ग्रामीणों ने गाँव के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा बोर्ड लगाकर साफ संदेश दिया है कि अब किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन या धर्मांतरण के उद्देश्य से गाँव में प्रवेश वर्जित है।

कांकेर जिले का 12वां गाँव
टेकाठोडा (कच्चे) गाँव ऐसा करने वाला कांकेर जिले का बारहवाँ गाँव बन गया है, जिसने मतांतरण के खिलाफ औपचारिक निर्णय लेकर गाँव के बाहर बोर्ड लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय उनकी संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली की रक्षा के लिए ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से लिया है।
‘प्रलोभन देकर धर्मांतरण के खिलाफ है विरोध’
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका यह विरोध किसी धर्म विशेष से नहीं है। उनका कहना है कि गाँव में पिछले कुछ समय से आठ परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया है, जिससे गाँव की सामाजिक संरचना और पारंपरिक जीवनशैली पर गहरा असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का मुख्य विरोध उन गतिविधियों से है, जहाँ लालच, प्रलोभन या मदद के नाम पर सीधे-साधे लोगों का धर्म बदलवाया जा रहा है। उनका मानना है कि यह कदम आदिवासी संस्कृति के लिए खतरा है और पुरखों की परंपराओं को कमजोर कर रहा है।

‘पेसा अधिनियम और संवैधानिक सुरक्षा के तहत लिया गया फैसला’
ग्राम सभा ने अपने निर्णय के समर्थन में संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया है। प्रवेश द्वार पर लगाए गए बोर्ड में साफ लिखा है कि यह फैसला पेसा अधिनियम 1996 के नियम चार (घ) के तहत लिया गया है, जिसके अनुसार ग्राम सभा को सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है।
ग्रामीणों का मानना है कि यह कदम संविधान की पाँचवीं अनुसूची में आदिवासी क्षेत्रों को दी गई स्वशासन और सांस्कृतिक सुरक्षा की भावना के अनुरूप है। कांकेर जिले में अब तक कुल 12 गांवों ने इस तरह का ठोस कदम उठाया है, जिसने जिले भर में एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है।



