
रायपुर: छत्तीसगढ़ में नए साल 2026 का स्वागत मदिरा प्रेमियों के लिए बेहद खास रहा। पुराने साल की विदाई और नए साल के जश्न के दो दिनों में प्रदेश के लोगों ने करीब 102 करोड़ रुपये की शराब गटक ली। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 6 करोड़ रुपये अधिक है। आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर को 53 करोड़ और 1 जनवरी को 49 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई। जश्न का माहौल केवल इन दो दिनों तक सीमित नहीं था, बल्कि 30 दिसंबर को भी लोग करीब 36 करोड़ रुपये की शराब डकार गए थे। होटलों और रिसॉर्ट्स में हुई भारी भीड़ ने इस खपत को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।
विदेशी शराब के प्रति बढ़ा रुझान
राज्य में शराब पीने वालों की पसंद में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़िया अब देशी मदिरा के बजाय विदेशी (अंग्रेजी) शराब को अधिक तरजीह दे रहे हैं। राजधानी रायपुर के आंकड़ों पर गौर करें तो विदेशी शराब की खपत में पिछले साल की तुलना में 50 लाख रुपये से अधिक का इजाफा हुआ है। इसके उलट देशी शराब की बिक्री में करीब 12 लाख रुपये की गिरावट दर्ज की गई। यह स्पष्ट संकेत है कि मदिरा प्रेमियों का स्वाद अब प्रीमियम ब्रांड्स की ओर झुक रहा है। सरकार द्वारा टैक्स में किए गए कुछ बदलावों और बेहतर उपलब्धता ने भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दिया है।
राजस्व बढ़ाने के लिए नई लिकर पॉलिसी
सरकार अब राजस्व में और बढ़ोतरी करने के लिए 1 अप्रैल 2026 से नई आबकारी नीति लागू करने की तैयारी में है। इस नई नीति के तहत भी शराब बेचने की जिम्मेदारी ‘बेवरेज कॉर्पोरेशन’ के पास ही रहेगी। दरअसल, इस साल सरकार ने 11 हजार करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक केवल 8 हजार करोड़ रुपये ही सरकारी खजाने में आए हैं। लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार नई पॉलिसी में कुछ कड़े बदलाव कर रही है। साथ ही, पड़ोसी राज्यों से आने वाली अवैध और नकली शराब को रोकने के लिए एक विशेष कार्ययोजना पर भी काम किया जा रहा है ताकि केवल प्रमाणित शराब ही दुकानों तक पहुंचे।
शराब घोटाला और कड़े सरकारी नियंत्रण
छत्तीसगढ़ में शराब हमेशा से एक संवेदनशील और राजनीतिक मुद्दा रहा है। राज्य में हुए 3 हजार करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं, जिसके चलते कई बड़े अधिकारी और राजनेता फिलहाल कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इसी कारण से सरकार ने अब शराब की बिक्री का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में रखा है ताकि निजी ठेकेदारों की मनमानी और अवैध सिंडिकेट पर लगाम कसी जा सके। सरकार का दावा है कि वह नकली शराब से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए सरकारी दुकानों के जरिए ही वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
सड़क हादसों का डराने वाला सच
जश्न के बीच एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि शराब पीकर वाहन चलाना जानलेवा साबित हो रहा है। साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में छत्तीसगढ़ में लगभग 6,500 सड़क हादसे हुए, जिनमें 2,960 लोगों ने अपनी जान गंवाई। आंकड़ों की मानें तो कुल सड़क हादसों में से 5 से 7 फीसदी मामले सीधे तौर पर ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ से जुड़े होते हैं। पुलिस प्रशासन ने हाल ही में रायपुर में 1,500 से अधिक ऐसे मामले पकड़े हैं, जिनमें 680 लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। यह आंकड़े चेतावनी देते हैं कि शराब का नशा न केवल स्वास्थ्य बल्कि आपकी और दूसरों की जान के लिए भी बड़ा खतरा है।
शराब दुकानों की बिक्री

शराबबंदी की मांग और हकीकत का अंतर
प्रदेश में लंबे समय से पूर्ण शराबबंदी की मांग उठती रही है और सरकार भी सैद्धांतिक रूप से इसे स्वीकार करती है। समय-समय पर शासन द्वारा लोगों से शराब छोड़ने की अपील भी की जाती है ताकि छत्तीसगढ़ को नशामुक्त बनाया जा सके। हालांकि, साल-दर-साल बढ़ता बिक्री का ग्राफ कुछ और ही कहानी बयां करता है। आंकड़े बताते हैं कि सामाजिक और सरकारी अपीलों के बावजूद मदिरा प्रेमियों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। ऐसे में फिलहाल राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करना प्रशासनिक और आर्थिक दोनों ही मोर्चों पर एक बड़ी चुनौती नजर आती है।
जागरूकता ही बचाव का एकमात्र रास्ता
शराब की खपत के यह आंकड़े दिखाने का उद्देश्य किसी भी तरह से नशे को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि समाज को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराना है। शराब का अधिक सेवन न केवल पारिवारिक कलह का कारण बनता है बल्कि व्यक्ति को आर्थिक और शारीरिक रूप से भी तोड़ देता है। प्रशासन और सामाजिक संगठन लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं कि वे अपनी और अपने परिवार की खुशहाली के लिए नशे से दूर रहें। अंततः, एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम जश्न के नाम पर अपनी जान जोखिम में न डालें और मर्यादित जीवनशैली अपनाएं।



