किश्त न मिलने से रुके पीएम आवास के निर्माण

रायपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बड़ी संख्या में लोगों ने नया घर बनाने के लिए नगर निगम में आवेदन दिया था। कई परिवारों ने मंजूरी मिलने की उम्मीद में अपना पुराना मकान तोड़ दिया और किराए के घरों में रहने लगे। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी योजना की किश्त जारी नहीं हुई। इससे आवास निर्माण रुक गया और कई परिवार आर्थिक परेशानी में घिर गए। कुछ लोगों ने तो कर्ज लेकर निर्माण आगे बढ़ाने का सोचना शुरू कर दिया है।

नगर निगम कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन

किश्त न मिलने से नाराज हितग्राहियों ने सोमवार को नगर निगम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। दो सौ से अधिक लोगों ने योजना की धीमी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और नाराजगी जाहिर की। कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी, नेता आकाश शर्मा और कन्हैया अग्रवाल ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने महापौर मीनल चौबे पर भी लापरवाही का आरोप लगाया।

800 हितग्राहियों को किश्त देने का भरोसा

करीब दो घंटे बाद नगर निगम अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बात की और आश्वासन दिया कि 20 दिसंबर तक लगभग आठ सौ हितग्राहियों के खातों में राशि जमा कर दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि दो सौ लोगों को चौबीस घंटे के भीतर और अगले दो सौ लोगों को दो से तीन दिनों में किश्त भेजी जाएगी। बाकी समूह को भी निर्धारित तारीख तक राहत मिलने की संभावना जताई गई।

लोगों ने सुनाई अपनी परेशानियाँ

आश्वासन मिलने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया। कई महिलाओं ने बताया कि उन्होंने स्वीकृति मिलने के बाद अपना मकान तोड़ दिया था और किराए पर रहने लगी थीं। छह महीने से किश्त न मिलने के कारण निर्माण अधूरा है और इस तनाव ने परिवारों पर भारी असर डाला है। एक महिला ने कहा कि लगातार तनाव से उसकी बेटी की तबीयत बिगड़ गई। ऐसे कई परिवारों ने सरकार से जल्द किश्त जारी करने की मांग की।

दस दिनों में समाधान का भरोसा

धरने में मौजूद नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि अगले दस दिनों में समस्या का समाधान करने की कोशिश की जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने उम्मीद जताई कि वादा समय पर पूरा हो और वे जल्द अपने घर का निर्माण फिर शुरू कर सकें।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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